न से गीतिकाएँ
70 रचनाएँ
- *नित प्राणायाम करें, जीवन में बहे शान्ति की धारा,
- न तारणहार, प्रभु करुणा के अवतार,
- नई भोर
- नए क्षितिज की खोज
- नए वर्ष में प्रवेश हो सुखकारी।
- नए सृजन के लिए
- नखरालो ओ मनड़ो मुश्किल स्यूं वश में आवै,
- नगर के लोक तो
- नगर-नगर ओ द्वारे-द्वारे मन्दिर, मस्जिद, धाम
- नटखट मुन्ना करता खड़बड़।
- नन्दन वदनाजी रा झेलो म्हारा वन्दन तुलसी
- नन्दन वन
- नभ आज प्रभाती गाए, सरगम की धुन गुंजाए,
- नमन
- नमन महाश्रमण गुरुवर को, सदा जो जगमगाते हैं,
- नमन है देवों के भी देव
- नमस्कार उन सन्त जनों को, जो जीना सिखलाते हैं
- नमस्कार महामंत्र
- नमो अरहंताणं
- नमो अरहन्तं नमो भगवन्तं
- नया सृजन करने वाली, हम नवयुग की बालाएं।
- नर श्रेष्ठ बही जिसने जीने की कला जानी,
- नर से नारायाण
- नर-भव सारा तूने यों ही बिताया,
- नव निर्माण
- नव वर्ष मुबारक हो यह, तुम गति प्रतिष्ठा त्राण,
- नव शिक्षा के द्वारा करना जीवन का उत्थान अब
- नव-निर्माण
- नवघाटी मांही
- नशा नाश का द्वार है, सद्गुरु के उद्गार हैं,
- नश्वर काया
- नश्वर जीवन की माया इसमें क्या ललचाया है?
- ना छोड़े, ना छोड़े, ना छोड़े रे,
- ना ना ना मन लुभाना ना,
- नाथ! दरश पाने तरस रहा मन,
- नाभि-नंद जिन-चंद समो भिक्षु स्वामी।
- नाभिराजा
- नाम तुम्हारा अमर
- नाशवान काया
- निज भूल सुधारो जी
- निज रो रूप निहारो
- नियठा दिग्दर्शन
- नियति निराली
- निर्मम विधान
- निर्माण के नेपथ्य से
- निर्माण के स्वर
- निर्वाण ज्योति
- निशदिन ध्याऊं
- निशिदिन ध्यान धंरू, अजपाजप मैं करूं।
- निश्चय वज्र
- निष्फल है केवल वेश रुचिर
- निसर्ग
- निहारा तुमको कितनी बार
- निहारो, दिल के दर्पण में
- नीर
- नेकी वाले काम
- नेमजी को जान
- नेमा नन्दन प्यारा प्यारा
- नेमा नन्दन, झेलो वन्दन
- नेमा मां के नदन
- नेमां का नन्द दुलारा, सबको लगता प्यारा,
- नेमां मां के नन्दन, करते तुमको वन्दन,
- नेमां रो दुलारो, म्हारै मन में बसै,
- नेमानन्दन, गण के भूषण, वरदान तुम्हारा है साया,
- नैनों में समाये, प्रभु ही सुहाये,
- नैया अपनी भव से तू पार लगा ले,
- नैया पार लगा जाओ
- नैय्या पार
- नौजवानों जाग जाओ, देश के आधार हो तुम।
- न्याय मार्ग के साथ रहो तुम।