ह से गीतिकाएँ
58 रचनाएँ
- *हम कायोत्सर्ग प्रयोग करें, तन की चंचलता को छोड़े,
- हंस उड़ चला
- हंस और बगुला समान है।
- हम अच्छे इन्सान, बन दिखलायेंगे,
- हम अनुगामी
- हम ऐसा पथ अपनाएं,
- हम करें महावीर की आराधना।
- हम बनें उपासक वर साधक शासन की सेवा में तत्पर।
- हम महावीर को सिर झुकाएं,
- हम वन्दन शत शत बार करें, भगवान्! तुम्हारे चरणों में,
- हम वह आदर्श दिखाएं,
- हम श्रावक तेरापंथ के,
- हम ही गण हैं
- हमको दो वर नाथ! सत्पथ पर सदा चलें,
- हमारा है यह दृढ़ संकल्प, धर्म-पथ पर डट जाएंगे,
- हमारा हो संकल्प महान, बनें हम ज्ञानवान बलवान।
- हमारे भाग्य बड़े बलवान
- हमारे संकल्पों की धार,
- हमें जगाना शुभ संस्कार, वे ही है जीवन आधार
- हर धड़कन में भिक्षु
- हर सपने को सत्य करें हम, ऐसा दृढ़ संकल्प जगायें,
- हरदम नाच नचावै
- हरषै-हरषै रे आंगणिए, मोती बरसे रे
- हरी-भरी बगिया को, प्रभुवर! क्यों छोड़ गए।
- हां जी छाई मौसम में खुशहाली म्हांरै,
- हार से न निराश होते
- हिम्मत को साथी
- हिल-मिल संघ-चतुष्टय. उत्तव आज मनाएंगे।
- हिव हेम प्रभाते
- हृदय बसै गुरुवर माणक गणी।
- हे ज्योतिपुंज स्वीकारो
- हे तुलसी तेरे चरणों में वन्दन है बारम्बार
- हे दयालो! देव! तेरी शरण हम सब आ रहे
- हे दिव्य ज्योति, तुमको प्रणाम
- हे प्रभो! तुम ही हमारे नाथ हो।
- हे प्राण-देवते! तेरी ज्यों-ज्यों स्मृति हो रही।
- हे हम संदा भक्ति
- हे! महाश्रमण युगनायक
- हेलो जागण रो,
- है गौरवमय इतिहास, क्यों तुम भूल रहे।
- है चयन दिवस युवराज रो, गण आंगण खुशियां छाई।
- है जीवन थारो पाणी रो परपोटो,
- है धन्य आ धरा अठै, भगवान आज आया।
- है नश्वर जग की माया रे,
- है फूल वही जो प्रभु चरणों में चढ़ता
- है महारोग यह छुआछूत
- है लक्ष्य सामने
- है सफर यह जिन्दगी साथी! सदा बढ़ते चलो,
- हो ऐसा देश हमारा,
- हो गया नूतन सवेरा
- हो जाएगा सबेरा, मोह-नींद तू उड़ा ले,
- हो झूठा, झूठा इस दुनिया का खेल है,
- हो बल्लू-सुत वालहा वारु वीर-शासनविकसायो हो राज।
- हो रहा सत्ता का सत्कार
- होठों पर तेरे राम नाम, पर भीतर में जलती ज्वाला,
- होठों पै नित तेरे गीत गाऊं,
- होली रो ओ परव रंगीलो जग में आवै रे,
- होळी रो त्योंहार बावळो, बावळ घणी बढ़ावै जी।