ग से गीतिकाएँ
92 रचनाएँ
- गगन हरस घन छायो
- गण की आंखों के तारे भिक्षु! जन-जन के प्यारे भिक्षु!
- गण के आदिम-पुरुष! प्रणाम, पौरुष के प्रतिरूप! प्रणाम,
- गण नन्दनवन पा हरसावां
- गण रखवालो
- गण है हमारा
- गण-उपवन री मन्दार साध्वी कमलू जी
- गणदेव! मोरिया मन रा आज बुलावै आर्यदेव!
- गणधारी हो ब्रह्मचारी
- गणनायक गुरुवर महाप्रज्ञ चरणों में वन्दन करते हैं।
- गणनायक गौरवशाली
- गणाधिपति गुरुवर म्हारा लाखां आंख्या रा तारा
- गन्दी चीजें मत खाओ तुम।
- गफलत में मत खो मना, नहीं आछी पाछो हाथ
- गम खाणो, कम खाणो,
- गया अचानक इयां कियां म्हैं, सगला हुया उदास रे,
- गांठ हृदय की खोल
- गांधी के कमरे के अन्दर
- गाओ रे, गुरु गुण गाओ रे,
- गाड़ी चलती है छुक छुक छुक।
- गाती हूं मैं गीत तुम्हारे
- गाये जा, गाये जा रे, प्रभु गीत रे,
- गायेंगे तेरे गीत, जिनवर! सदा,
- गाली
- गावां, गावां, गावां म्हे तो, वीर गुण गावां हो
- गीतकार हो गया अगोचर
- गुण गौरव तुलसी का
- गुण ग्राहक
- गुण घुंघरू छम छमा छम – तपस्या री अनुपम महिमा
- गुण घुँघरू छम छमा छम – प्रभु महावीर विराजै रे
- गुण-मुक्ताओं की माला
- गुणस्थान-दिग्दर्शन
- गुणों की पूजा
- गुणों से महिमा
- गुरु अरु बहिनां रो संवाद
- गुरु का आशीर्वाद, सभी का मंगल हो,
- गुरु की छत्र छांव में, हुआ यह गण निहाल है।।
- गुरु को किया नमन कि मेरा दीप जल गया,
- गुरु ने जगाया
- गुरु बिना मिले भगवान नहीं
- गुरु भारमल्ल गुणधारी,
- गुरु महाप्रज्ञ का नाम
- गुरु ही तारणहार
- गुरु-महिमा
- गुरुकृपा
- गुरुजी म्हांनै सीख सुणाई जी।
- गुरुदेव के चरणों में नित शीश झुकाता हूं,
- गुरुदेव थांरै नाम में है एक गजब री शक्ति
- गुरुदेव दिवाकर तुलसी को, श्रद्धायुत स्मृति में लाएं हम।
- गुरुदेव ने दिया जो, उसको अमर बनाएं।
- गुरुदेव पधारे आंगण, सतरंगे फूल खिले...
- गुरुदेव! अचानक
- गुरुदेव! तुम्हारे चरणों में ये शीष स्वयं झुक जाते हैं।
- गुरुदेव! थांरी खिण-खिण-याद सतावै, आययदेव!
- गुरुदेव! थांरी यादां
- गुरुदेव! थांरी यादां घणी सतावै रात-दिन,
- गुरुदेव! थांरो विरह सहयो नहीं जावै—आर्यदेव!।
- गुरुदेव! दयासागर, हमें है नाज तुम्हारे पर,
- गुरुवर ! थांरी याद सतावैजी
- गुरुवर के गीत मिलजुल गायें,
- गुरुवर के गुण गाएं, गुरु का हम ध्यान लगाएं
- गुरुवर के हम हैं आभारी, जागी है अस्मिता हमारी।
- गुरुवर को अभिवन्दन
- गुरुवर को निकट बिठाएं
- गुरुवर गुरुवर चरणन में, आनंद है—आनंद है।
- गुरुवर तुमको स्मरे
- गुरुवर तुलसी श्री चरणों में वन्दन-वन्दन-वन्दन।
- गुरुवर दर्श दिरावो नी, हेलो देर् बुलावा।
- गुरुवर महाप्रज्ञ का भावना से भजन करें।
- गुरुवर श्री तुलसी म्हारै कालजै री कोर है,
- गुरुवर हैं उपकारी, जाएँ हम बलिहारी,
- गुरुवर! एकर पधारो
- गुरुवर! कण-कण में नव चिन्तन, भर दो, भर दो, भर दो।
- गुरुवर! जीवन में आध्यात्मिक संस्कार चाहिए
- गुरुवर! तुम हो
- गुरुवर! तुम्हारे जीवन से दिव्य ज्योति पाएं।
- गुरुवर! बसो म्हारै मन मन्दिर में, करद्यो जीवन रो उद्धार,
- गुरुवर! म्हांरो स्वीकारो अभिवन्दन श्रद्धाभावां रो।
- गुरुवर! सुन लेना, अर्ज मेरी तुम सुन लेना,
- गुरुवर! स्वस्थ रहो दिन रात।
- गुरुवर! हमको मर्यादा का आधार चाहिए,
- गुरुवर! हो गुरुवर!
- गुरुशिक्षा पर दे ध्यान, बहिनों अब जागो,
- गुरूदेव आपरी जद
- गृह प्रवेश गीत – श्वेतांबर तेरापंथी परिवार
- गौतम गणधर बड़े महान
- गौरव गाथा भिक्षु के बलिदान की
- गौरवमयी विरुदावली
- गौरवशाली गण उपवन की सौरभ सब में फैलाएं।
- गौरवशाली भारतीय संस्कृति
- गौरवशाली संघ हमारा इसकी महिमा गाओ,
- ग्रंथि-विमोचन