गीतिका संग्रह — पृष्ठ 15
2856 में से 841–900
- चौबीसी रो गीत
- चौमासी चवदश आई है, आ नई प्रेरणा ल्याई है,
- चौरासी की फेरी
- चौरासी में चाक ज्यूं रे
- चौराहे पर
- च्यानणीयों रहतां-रहतां मोतीड़ा पोयले
- च्यार दिनां री च्यांदणी, होसी आगै काली रात,
- छन्द-भटक भटक मन मृग जग वन में,
- छाया कैसा नशा कैसा नशा! समझन आये
- छोटी इकाई का अस्तित्व
- छोड़ जगत की चिन्ता, खुद को जान लें,
- छोड़ो क्यूं कोनी
- जंग यह जीवन का ले
- जंबू
- जग का प्यार देख मत भूल,
- जग के स्वार्थ मरे नाते, संत जन सबको समझाते,
- जग केवल सपना
- जग को जीतो मधुर प्यार से
- जग में दीन जले धनवानों से, धन वाले नेता से,
- जग यह मुसाफिरखाना है, चालू आना जाना है,
- जग सारा, मतलब का, झूठा सारा व्यवहार है, मतलबी यार है।।
- जग है मकड़ी का जाल
- जगत का कोई आकर्षण, मुझे भटका न पाएगा,
- जगत में मानव धर्म महान
- जगत सपनै री माया रे बादळिये-री-सी छाया रे
- जगमग तेरापंथ
- जगाओ युवकों अब नव जोश
- जन जन पुकारे भिक्षु हमारे महा उपकारी
- जन मन मंगलकारी, नेमिनाथ नमो,
- जन-जन के भगवान तुम्हीं हो महाश्रमण
- जन-जन में जागे विश्वास, संयम से व्यक्तित्व विकास,
- जन्म जयन्ति
- जन्मदिन मुबारक
- जन्मधरा निज लाडेसर रो, उत्सव आज मनावै है।
- जन्मभूमी केलवा में संघ-जन्मोत्सव मनाएं।
- जन्मोत्सव
- जप दिवस
- जप-तप रो रंग लगाओ
- जपलो भिक्षु नाम
- जपूं मैं प्रभु तुलसी का नाम
- जपें हम तुलसी तुलसी नाम
- जपो नवकार मंत्र ज्ञाता
- जब तक छूटे न माया जाल,
- जब तुम धरती पर आए थे
- जब तुम धरती पर आए थे—२
- जब पुण्य तिथि आती
- जब यह मन निराश होता है
- जबर झंड चंदेरी गढ़ में चरमोच्छव-छाया।
- जबरी ज्योति जलाई
- जय गणाधिपति गुरुदेव,
- जय जय बोलो बालूजी रे लाल री
- जय जय शासन
- जय जय श्री तुलसी गुरुवर!
- जय जयाचार्य श्री गणिवर की
- जय जीवनदाता गुरुवर!
- जय ज्योतिर्धर! धर्मक्रान्ति कर गहरा दर्शन पाया,
- जय ज्योतिर्मम चिन्मय दीप जले।
- जय तेरापंथ प्रणेता की,
- जय तेरापथ नवमें नायक
- जय त्रिशला-सुत वीर महान्,