गीतिका संग्रह — पृष्ठ 17
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- जावां बलिहारी,
- जिंदगी में सफल होना, नहीं अवसर हाथ से खोना।। ध्रु.।।
- जिजीविषा
- जिज्ञासा, प्रज्ञा और आस्था
- जिन भाख्या पाप अठार
- जिन शासन तेज बढ़ाया रे
- जिनकल्पी कष्ट उदीरी नैं लेवै
- जिनकल्पी कष्ट उदीरी नैं लेवै
- जिनवर का नाम ले, प्रभुवर का नाम ले,
- जिनवाणी को जीवन में उतारा नहीं,
- जिन्दगी उपचार बनकर रह गई,
- जिन्दगी में फूल बनकर मुस्कराना चाहिए,
- जिन्दगी यह मिली है सुनहरी, कोडियों में न इसको तूं खोना,
- जिन्दगी सफर तेरी, कहीं न ठिकाना है,
- जिन्दगी सुफल बनाएं हम।
- जिन्दगी है सफर मुस्कुराते चलो,
- जिम द्रुम पत्रज पांडुरो
- जिस मानव के मानस में बहती करुणा की रसधार नहीं,
- जिसका जीवन सद्गुण का भण्डार है।
- जिसकी आज जरूरत उसने
- जिसको अपनी है पहचान,
- जी रहे हो जिंदणी
- जीणो थोड़ी सो बावला, जीणो थोड़ो सो ।।
- जीना भी है एक कला
- जीना है दिन चार
- जीवड़ला आंख उघाड़लै जागण री बेला आई,
- जीवड़ला करलै च्यांदणो ले अरे धर्म री ओट,
- जीवन
- जीवन अनमोल
- जीवन अमोल है,
- जीवन ओ दो दिन रो, पाणी ज्यूं बह ज्यासी।
- जीवन कहानी
- जीवन का आभास
- जीवन का वरदान
- जीवन की इस धरती को तुम सत्य-वृत्ति से सींचो,
- जीवन की कला
- जीवन की ज्योति जला,
- जीवन की परिभाषा
- जीवन की यदि शान बढ़ाना।
- जीवन के राही! रे
- जीवन को पावन बनाते चलो,
- जीवन जीना कब आयेगा
- जीवन तुम्हारा एक वरदान है,
- जीवन तुम्हारा पल-पल यह बीत जायेगा ।
- जीवन नै पावन करणै रो, ओ मारग धर्म बतावै है
- जीवन पाणी रै प्रवाह ज्यूं वह ज्यावै रै चेतनिया,
- जीवन पावन करण, सच्ची तेरी शरण, त्रिशलाप्यारे,
- जीवन बहता पानी
- जीवन बीतै पल-पल, ओ र है सरिता रो जल,
- जीवन बीत्यो जावै, कर ले धर्म कमाई।
- जीवन मंगलमय हो।
- जीवन में तुम भला करो, कभी न किसी को छला करो,
- जीवन में तुम में तुम करो भलाई।
- जीवन में व्रत जो अपनाये, श्रावक हो तो ऐसा हो,
- जीवन यात्रा
- जीवन रीत लिये आया हूं
- जीवन रो आर है न पार मौत तो है पल भर की,
- जीवन रो फूल खिलाल्यो थे
- जीवन रो व्यवहार सुधारै,
- जीवन रो, कांई है भरोसो भाई जीवन रो?