गीतिका संग्रह — पृष्ठ 39
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- लघु-सा उपहार स्वीकार करो
- लघुत्व
- लाखां आंखडल्या माहि, प्रभुवर थांरी तस्वीर।
- लाग रह्यो चौमास
- लागै प्राणां स्यूं प्यारो
- लाडणूं रो हीरो
- लाडनूं रो हीरो
- लापरवाही अति दुखदायी।
- लालच! क्यों ठोकर खाते हो
- लीला कर्मों की अलबेली
- ले नये निर्माण का व्रत आज अभिनंदन करें।
- लेते समय श्वास, अर् हो उच्चारण।
- लेवे मनड़ै नै जो तू समझाय,
- लो कालजयी व्यक्तित्व हमारा वंदन।
- लो जैन जगत के तीर्थंकर! मेरा प्रणाम लो
- लो दयानिधे ! चरण शरण में, द्वार तुम्हारे भक्त खडा़ है ।
- लो लाखों अभिनन्दन आत्म-विजय का दो वरदान।
- लो वंदन अभिवंदनाएं-अभिवंदनाएं।
- लोभ
- लौट के लौट के आयेगा ना गुज़रा समां
- वंदन बारम्बार
- वंदन श्रुत-सम्राट
- वंदन स्वीकारो म्हारा
- वंदना करने यहां
- वंदना महावीर लो अभिवंदना
- वंदना है सघ को, संघ की उमंग को-2
- वंदे जिनेन्द्रम्
- वदना मां का नन्दन दुलारा, तुलसी न सभी को बड़ा प्यारा-२,
- वदनानन्दन गुरु तुलसी को वन्दन शत-शत बार,
- वदनासुत तुलसी का हम गौरव गाते हैं,
- वन्दन
- वन्दन वन्दन तुमको बालू नन्दन
- वन्दन हो अभिनन्दन हो, ये तन-मन चरण चढ़ाएं हम
- वन्दना
- वन्दना महावीर सौ सौ वन्दना
- वन्दना लो झेलो
- वन्दना लो झेलो, भक्तां री भगवान!
- वरदान जिन्दगी है, ये संत बताएं,
- वरदान दे दो
- वर्षा
- वर्षी तप करकै, श्रावकजी नव इतिहास बणायो,
- वर्षी तप री महिमा
- वह कौन?
- वाणी संयम दिवस
- वारी जाऊं चरणां में,
- वारी भिक्षू स्वाम की, धारी शिर जिन-आण अखंड क।
- वार्षिक मर्यादोत्सव आया।
- विगत पर पछताना निष्फल है
- विघ्न विनायक मंगलदायक स्वामीजी रो नाम
- विघ्न हरण – अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो
- विचार किया क्या?
- विजय गीत
- विजय ध्वज फहराए, भिक्षु चेतना वर्ष,
- विजय-विजया
- विदा समय की शिक्षा
- विदाई
- विदाई गीत
- विद्या का वरदान है, यह जीवन विज्ञान है,
- विध्न विनायक मंगलदायक, शासननायक शान्ति विधायक,
- विध्वंस