गीतिका संग्रह — पृष्ठ 47
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- स्वागत वेला
- स्वाध्याय दिवस
- स्वाध्याय दीपक
- स्वाध्याय से आत्मलीनता
- स्वाध्यायी बण भीतर झांको, भीतर झांको,
- स्वाम साचा
- स्वामी जी रै चरणां, तन-मन अर्पण करियो रै, करियो रै।
- स्वामी पंथ दिखाओ जी
- स्वामी भीखण जी रो नाम, आसी भव-भव मांही काम
- स्वामी भीखणजी कद स्यूं, म्हें बाट निहारां
- स्वामी भीखणजी री आण,
- स्वामी भीखणजी रो नाम आठूं याम ध्यावां।
- स्वामी भीखणजी-3,
- स्वामी भीखणजी!
- स्वामी! कौन-सा सुरीला गीत
- स्वामीजी का नाम हमारे लिए सहारा है
- स्वामीजी थांरै संघ री महिमा महकावै है
- स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे गावां यशोमय गान
- स्वामीजी थारी साधना रो पार न कोई पायो।
- स्वामीजी थारै शासन में मौज उड़ावा हां
- स्वामीजी म्हानै दरसण दीन्हाजी
- स्वामीजी राह दिखावो
- स्वामीजी रै नाम री सब रोज फेरो माळा
- स्वामीजी रो नाम म्हारै मनड़ै में रमग्यो,
- स्वामीजी रो शासण, म्हांनै घणो सुहावै जी।
- स्वामीजी रो शासन म्हारै हियड़ै रो हार है।
- स्वामीजी! आवो देखल्यो
- स्वामीजी! एकर तो देखो
- स्वामीजी! झणण झणण
- स्वामीजी! थांरी साधना री
- स्वामीजी! थांरै चरणां री बलिहारी जावां हां,
- स्वार्थ का संसार
- स्वार्थ के साथी
- स्वार्थी दुनियां
- स्वार्थों का बलिदान करो तुम।
- हंस उड़ चला
- हंस और बगुला समान है।
- हम अच्छे इन्सान, बन दिखलायेंगे,
- हम अनुगामी
- हम ऐसा पथ अपनाएं,
- हम करें महावीर की आराधना।
- *हम कायोत्सर्ग प्रयोग करें, तन की चंचलता को छोड़े,
- हम बनें उपासक वर साधक शासन की सेवा में तत्पर।
- हम महावीर को सिर झुकाएं,
- हम वन्दन शत शत बार करें, भगवान्! तुम्हारे चरणों में,
- हम वह आदर्श दिखाएं,
- हम श्रावक तेरापंथ के,
- हम ही गण हैं
- हमको दो वर नाथ! सत्पथ पर सदा चलें,
- हमारा है यह दृढ़ संकल्प, धर्म-पथ पर डट जाएंगे,
- हमारा हो संकल्प महान, बनें हम ज्ञानवान बलवान।
- हमारे भाग्य बड़े बलवान
- हमारे संकल्पों की धार,
- हमें जगाना शुभ संस्कार, वे ही है जीवन आधार
- हर धड़कन में भिक्षु
- हर सपने को सत्य करें हम, ऐसा दृढ़ संकल्प जगायें,
- हरदम नाच नचावै
- हरषै-हरषै रे आंगणिए, मोती बरसे रे
- हरी-भरी बगिया को, प्रभुवर! क्यों छोड़ गए।
- हां जी छाई मौसम में खुशहाली म्हांरै,