गीतिका संग्रह — पृष्ठ 44
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- समय ओ बीत ज्यावैलो
- समय का अंकन हो
- समय की कीमत
- समय की पदचाप
- समरां बाबै रो नित नाम
- समर्पण है क्या इसका नाम ?
- समाई सुखदाई हो
- समाधि गीत-भावै भावना
- समीकरण
- सम्प्रदाय की दीवारों ने बांट दिया है इन्सानों को,
- सम्बन्ध
- सम्यक् आजीविका
- सम्यक् संस्कार
- सम्यक्त्व
- सम्यग् ज्ञान
- सम्यग्दर्शन
- सरल थारो सारो बणा रै व्यवहार,
- सरलमना हो प्रात: सायं नित प्रतिक्रमण करूं,
- सरस्वती की ओ संतानों! वसुधा तल के ओ प्रहरी!
- सर्व योग्यता युत, देव अरहंतं।
- सर्वाधिक संयम-सौरभ सुखकार है।
- सर्वोत्तम दिन साधना का
- सहज सादगीमय्य जीवन हो।
- सहन करो सफल बनो
- सहनशीलता
- सहने वाला गौरव पाता।
- सहारे तुम्हारे त्रिशलादुलारे, लाखों ने नैया पार उतारी,
- सांवरा स्वामी जी
- सांवरा! हो सांवरा! स्वामीजी! स्वामीजी!
- सांवरिए री ऊर्जा में, नित न्हावा रे, म्हांरो सांवरियो!
- सांवरिया ! थोरै नाम रो, है म्हानै आधार,
- सांवरिया थोरै संघ स्यूं लागी म्हांनै प्रीत
- सांवरिया भिखणजी ओ, करां थांरी ध्यावना,
- सांवरिया मूरत दिखादे रे,
- सांवरिया रो नाम नित ध्यावां म्है, नाम नित ध्यावां म्है,
- सांवरिया स्वामी जी
- सांवरिया स्वामी जी! आवो
- सांवरिया स्वामी! थांरो ही भगतां ने है आसरो,
- सांवरिया! तेरे संघ की शोभा दुनिया में है छाई,
- सांवरियाऽऽऽऽ तेरे चरणों में प्रणाम है, मेरा प्रणाम है,
- सांवरिये भरग्यो रे उजास...
- सांवरिये रो नाम लियां काम सरैला – रात री अन्धेरी में जो जाप करैला
- सांवरियो म्हारै रूं रूं में रमग्यो – मिश्री में मीठास बण्यो
- सांस की टूट ज्यासी लड़ी,
- सांसा रो खजानो थारो रीतै रै,
- सांसों का चयन
- सांसों का है क्या विश्वास, आए ना आए,
- सांसों की वीणा का गुंजे सरगम,
- सांसों की वीणा को गीत सुहाता है,
- साच नै आंच नहीं है।
- साथी पंथ बनाना होगा
- साथी प्यारे सुख में इतना क्यों लुभाता है,
- साथी से
- साथी से
- साथी! तब तक बढ़ते जाना, मंजिल जब तक नहीं हाथ लगे,
- साधक से
- साधना
- साधना के उच्च शिखरों पर विजय अभियान हो अब।
- साधना गीत—1
- साधना गीत—2