गीतिका संग्रह — पृष्ठ 19
2856 में से 1081–1140
- झूमते शाखी गगन में
- झोली भर लाती
- टररररररर मेंढका बोलण लाग्या बोल,
- टिक-टिक करती घड़ी सुनाती।
- टूट न जाए तार हृदय के
- टेढ़ा क्यूं चालोजी,
- टोकरियो
- ठाग
- डेणी लख दुनिया नै सोचै ओ ह कलजुग है आयो,
- ढ़ंढण ऋषि
- ढाल
- ढाल
- ढाल : १
- ढाल : १
- ढाल : १
- ढाल : २
- ढाल : २
- ढाल : ३
- ढाल : ३
- ढाल : ४
- ढाल : ४
- ढाल : ५
- ढाल : ५
- णमो गुरुदेवाणं – उगी सुनहली भोर
- णमोकार गीतिका
- तको दूसरों का न सहारा।
- तन धन रो कांई रे गुमान करै
- तन्मय
- तप करने वालो का, अभिनन्दन करते है
- तप का रंग
- तप का स्वागत सौ-सौ बार
- तप का है ऊँचा स्थान
- तप का है तेज निराला
- तप की खरी कमाई
- तप की गंगा में पाप बहाओ
- तप की गरिमा
- तप की ज्योति में तपकर
- तप की धार
- तप की निर्मल धारा
- तप की महिमा
- तप की शक्ति महान्
- तप की साबुन
- तप की सौरभ
- तप गंगा
- तप घुंघरु बाजै रे
- तप पग-पग। मंगलकारी
- तप पावन तीरथ
- तप में कदम बढ़ाओ
- तप में जुट जाओ
- तप में तेज गजब रो भाई!
- तप में समता
- तप री गंगा में
- तप री महिमां भक्ति भाव स्यूं म्है नित गावां रे, गावां रे
- तप री शक्ति महान
- तप रे क्षीर समंदर मांहिं, आओ न्हावां—आपां!
- तप रे झूलै में
- तप रो काम करारो।
- तप शक्ति बेजोड़
- तप सुखकारी मंगलकारी हो तप री महिमा अति भारी
- तप स्यूं आतमा में भारी बळ आवै