य से गीतिकाएँ
36 रचनाएँ
- *योगाभ्यास से मिटायें रोग हम तमाम,
- यदि अपना इतिहास पढ़ो तो
- यह गण समुद्र कहलाए।
- यह जग सपनों की है माया
- यह जिन्दगी है उपहार, खो नहीं जाए,
- यह जीवन एक कहानी है
- यह जैनी जीवन शैली, जो भी अपनाता है।
- यह तन मिट्टी का
- यह तेरापंथ महान
- यह दुनिया एक अजब माया
- यह भारतभूमि हमारी है
- यह मानव जीवन, सबसे पावन,
- यह वसुधा ही जिसका घर है, वह महामानव कहलाता है,
- यह विश्व विचित्र अरे! कैसा?
- यह संघ हमारा प्राणकोश
- यह संघ हमारा है
- यह हमारा महा पर्व संवत्सरी।
- यह है जगने की
- यही है जीने का विज्ञान,
- युग के प्रणेता तेरा
- युग-युग करना रखवाली
- युगपुरुष आर्यवर! – युग की पीड़ा का विष पीकर
- युगप्रधान आचार्यप्रवर को नमन करें,
- युगप्रधान! युगनायक! वंदन
- युगस्रष्टा
- युवकों! अविरल कदम बढाओ,
- युवा दम्पती ! निज जीवन में धार्मिकता को अपनाना,
- युवा बन्धुओं! आओ नव इतिहास बनाना है।
- युवाचार्य अभिवंदना
- युवाचार्य श्री अष्टम् गादी सोहै हो।
- युवाराजा म्हांनै प्यारा लागो, प्यारा लागो, मनहारा लागो,
- ये अक्षय तीज का उत्सव, अमल उपहार दे अभिनव।
- ये खुशियां, दो दिन की,
- यों तो चिहुं दिशि में उजियारा,
- यों तो दुनियां के मेले में लाखों नर आते जाते हैं,
- यौवन वह जाए ज्यों नीर,