म से गीतिकाएँ
303 रचनाएँ
- ''महाश्रमणीजी के प्रति''
- 'मुंबई महानगर री झांकी'
- *मंगलमय भावों को जीवन में अपनायें हम,
- *म्हारे गुरुवर रो बड़े भ्रात सहसा सुरग सिधायो रे,
- मंगल गावो रे।
- मंगल गीत
- मंगल ज्योति
- मंगल भावना
- मंगल भावना
- मंगल मर्यादा का पर्व, सबको होता सात्त्विक गर्व,
- मंगल वीतराग भावना
- मंगल स्तुति – ॐ मंगलं ओंकार मंगलं
- मंगल है आज तेरे शासन में मंगल मंगल।
- मंगल है गुरु नाम, गुरु की जय बोलो,
- मंगल-माल है
- मंगल, ओ बने हर पल,
- मंगलमय आज का दिन, मंगलमय कल होगा,
- मंगलमय नव वर्ष, सभी में हर्ष, आज है छा रहा,
- मंगलीक सरणां च्यार
- मंजिल को पाना है मुझे, बस रहे सदा यह चाह,
- मंजिल तेरी दूर नहीं पांव उठा प्यारे,
- मंत्रों का सरदार
- मघवा अघ-वारण नै ईं धरती पर आया,
- मघवा गादीधर म्हारा
- मघवा स्तुति
- मत कर तूं विश्वास सांस रो कद चलतो ओ रुक ज्यावै,
- मत कर रे मना तूं इतणो रोष,
- मत करना दर्जन की संगत।
- मत खेलो हिंसा की होली
- मत मदिरापान करो
- मत समझो मैं हार रही हूँ
- मतलबी ये नाते, भरमाते, जन दुःख पाते हैं,
- मतिमन्त मुणी
- मद्यपान पापों का पनघट।
- मन
- मन इत उत तूं
- मन करता है
- मन की चंचलताओं और तन की लोलुपताओं में,
- मन के खुले किंवार
- मन को धोलो, गांठें खोलो, बन जाओ गुणवान्,
- मन को शान्त बनाएं हम
- मन क्यों रोता है
- मन दर्पण को स्वच्छ बनाओ।
- मन निर्मलता को प्राप्त करो आनंद तुम्हें मिल जाएगा।
- मन नै साध्यां स्यूं ही साधना में रंग आवैला,
- मन नै साफ राखीजे
- मन प्रभु-दर्शन का प्यासा,
- मन भर-भर आए
- मन मंदिर के देवते!
- मन मंदिर में प्रभु आओ तुम, जीवन उपवन सरसाओ तुम,
- मन मन्दिर में आ जाओ प्रभु!
- मन मन्दिर में आ जाओ रे स्वामी,
- मन मन्दिर में शोभै बालूजी रा लाल,
- मन में गर्व कभी मत लाओ।
- मन में जागी भक्ति
- मन में बसा है, एक नाम तेरा,
- मन में भरो उजाला, अंधकार दूर होगा।
- मन में सौ सी गांठां और मुंह में सी सी गालियां,
- मन में हो जिसके प्रेम अपार,
- मन मोरे सुन जरा,
- मन म्हारो महकायो,
- मन रटन लगाये महावीर,
- मन री वीणा रा तार शासण परवरदिगार
- मन रे, तू क्यों न विचार करे?
- मन हर पल रटे, गुण गाये,
- मन है सच्चा प्रभु का मन्दिर।
- मन! क्षमा-धर्म अपनाओ,
- मन! सुमर सुमर नित भिक्षु नाम,
- मनमोहक लगता है मोर।
- मनमोहक वर्षा ऋतु आई
- मनवा नांय विचारी रे
- मनहारी, बाबै री मूरत प्यारी,
- मनावां हिलमिल सारा आज म्हें तो तपस्या रो त्यौहार
- मनुज अवतार पा तूंने, कमाया क्या अरे सोचो,
- मनुज को भगवान् की तब याद आती है,
- मनुज रूप में था वह ईश्वर
- मनुज, तूं क्यूं भरमायो रे,
- मनुहारों से भरा हुआ है
- मर्यादा को वन्दना
- मर्यादा गण-नन्दनवन मन्दार है।
- मर्यादा गणनन्दनवन-मन्दार है।
- मर्यादा गीत
- मर्यादा धरणी, मर्यादा अम्बर है
- मर्यादा पुरुषोत्तम स्वामी भीखण जी सिंवरां म्हें
- मर्यादा मोछब
- मर्यादा रा गीत – धरती अम्बर समन्दर गावै
- मर्यादा री ज्योति
- मर्यादा री महिमा
- मर्यादा शुद्ध निभाना,जो लिया सन्त का बाना रे।
- मर्यादा सुख की शाला है।
- मर्यादा ही जीवन
- मर्यादाओ का गहना
- मर्यादामय जीवन यह हमने पाया है
- मर्यादामय सुखमय सरस सुप्यार जो।
- मर्यादावां रो मोछव म्हैं आज मनावा रे,
- मर्यादित इस गण को पाकर पुलकित है तन मन,
- मर्यादित इस धर्म-संघ पर नाज सभी को है मन में,
- मर्यादोत्सव
- मर्यादोत्सव की आभा अभिराम है।
- महके चमन
- महा कठिन है काम तपस्या करता कोई बलवान रे
- महा-भिक्षु के प्रति
- महाज्ञानी को नमस्कार
- महातपस्वी महाश्रमण का प्यारा लगता नाम,
- महातपस्वी महाश्रमण की
- महापुजारी
- महापुरुष
- महापुरुष वे सदा अमर हैं
- महापुरूषों ने यह संदेश...
- महाप्रज्ञ अभिवंदना – उजली भोर आ सुखकार
- महाप्रज्ञ अभ्यर्थना
- महाप्रज्ञ आकार लिया
- महाप्रज्ञ का जीवन
- महाप्रज्ञ की जय बोलो
- महाप्रज्ञ के जन्म दिवस को आज मनायें हम,
- महाप्रज्ञ के जन्म-दिवस पर
- महाप्रज्ञ को जुहार
- महाप्रज्ञ को नमन हमारा
- महाप्रज्ञ गुणगाथा
- महाप्रज्ञ गुरुदेव!
- महाप्रज्ञ गुरुराज न भूले जायें,
- महाप्रज्ञ गुरुवर
- महाप्रज्ञ चरण
- महाप्रज्ञ जन्मोत्सव
- महाप्रज्ञ जी तुम्हें नमन है
- महाप्रज्ञ थे विरल
- महाप्रज्ञ नाम प्यारो, आंख्यों रो तारो
- महाप्रज्ञ महाप्राण
- महाप्रज्ञ स्तुति
- महाप्रज्ञ स्तुति
- महाप्रज्ञ! गण में प्रज्ञा विस्तार करो।
- महामंत्र महिमा
- महामनस्वी महायशस्वी
- महारानी कमलावती
- महावीर अवतरया धरती पर, जग हरस-हिलोरां स्यूं भरग्यो,
- महावीर उद्धार करो।
- महावीर का जाप
- महावीर का नाम मंगल
- महावीर का पैगाम
- महावीर की माला
- महावीर की शरण
- महावीर के चरणों में करते नमन,
- महावीर गुणगान
- महावीर जयन्ती
- महावीर जयन्ती आई
- महावीर तुम्हें शत वंदन, तुम हो हम सबके त्राता।
- महावीर नै भजो, महावीर ने नै भजो,
- महावीर प्रभु की जय हो जय।
- महावीर प्रभु के चरणों में
- महावीर भगवान् थांरो ध्यान धरूं जी, ध्यान धरू,
- महावीर महावीर बोल भाइड़ा!
- महावीर री ध्याऊं में तो ध्यावना जी,
- महावीर स्तवन
- महावीर स्वामी, अन्तर्यामी, मेरा तुम उद्धार करो,
- महाश्रमण अभिवन्दना
- महाश्रमण के अभिनन्दन में
- महाश्रमण गुरुवर
- महाश्रमण गुरुवर जी दुनिया से न्यारे हैं,
- महाश्रमण शासन श्रृंगार
- महाश्रमणी अभ्यर्थना
- महाश्रमणी गण सिणगार, हिवड़े में बसिया।
- महाश्रमणी रो आयो है, चयन दिवस मनभावनो।
- महाश्रमणीवरम्
- मा दीपां रा लाडला, वल्लू कुल उजियारा,
- मां
- मां की ममता हृदय विशाल
- मां दीपां री कुक्षी
- मां दीपांजी रो लाडलो, भिखण हो शुभ अभिधान जी,
- मां वदना रा कूख उजागर, सद्गुण शेखर,
- मां वदनां रा लाडला, तेरापंथ रा आधार, म्हारै हिवड़े रा हार
- मां वदनाजी का नन्दन
- माटी री काया
- माटी री काया में, क्यूं मन! तूं लुभावै,
- माटी री मूरत है काया, क्यूं तूं देख लुभायो?
- माणक गणिवर मन भाया,
- माता त्रिशला रा सपना
- माता बालू के आंगन किलकारी की आवाज—२
- मान
- मान जा मेरे मन, छोड़दे बद्चलन,
- मानव
- मानव की पहचान अणुव्रत
- मानव जनम सब में
- मानव जीवन नादानी में क्यों खो रहे,
- मानव जीवन बीत रहा है भैय्या करना हो सो कर लो।
- मानव तन
- मानव तन तुझे अमूल्य मिला, फिर क्यों तू भटका। है?
- मानव तन है उज्ज्वल चादर।
- मानव दो दिन का मेहमान है,
- मानव मन के तले, संयम दीप जले,
- मानव-जीवन पाकर तुमने क्या किया।
- मानव-जीवन है दुर्लभ
- मानवता के प्रहरी!
- मानवता के मंगल
- मानवता के मीत को, श्रद्धासिक्त प्रणाम,
- माया
- माया की जंजीर
- माया की बहार
- माया के बन्दे
- माया नगरी में बनकर दीवाना,
- माया में फंसा क्यों राही, तुझे दूर बहुत जाना है,
- मार पड़े पर हार न मानें
- मार्यादा को शीष चढ़ाएंगे, भिक्षु बाबे को पलकों बिठाएंगे।
- माला फेरले रे बंदे
- मिनख जमारो औळो खोवै मतना,
- मिनख जमारो पायो भोला क्यूं तू व्यर्थ गमावै है
- मिनख-जमारो पायो लाभ तूं कमाई,
- मिनखा-देही रो मोल समझो म्हारा जीवड़ा,
- मिनखां देही मिली तनै अनमोल, अब तो सोच रे
- मिनखां देही री, मिनखां देही री, मिनखां देही री,
- मिनखां देही रो मोल सब कूंतो सही
- मिनखां! थे जागो रे,
- मिला अमित आनन्द आत्मबल,
- मिला दुर्लभ मनुज जीवन, इसे यों ही न खो देना।
- मिला है संघ ये पावन, मधुर पाया है अनुशासन।
- मिले तब जीवन में आनन्द
- मिल्यो अमोलक मिनख जमारो,
- मिल्यो मिनख अवतार, चेत तूं बावळा!
- मीठी वाणी
- मीठो सांवरिये रो नाम जाणै मिसरी री डळी
- मुख पर हरदम मुस्कान रहे
- मुख पे नित गूंजे महावीर नाम,
- मुझको मुझ तक ही रहने दो
- मुझे तो करना निज कल्याण।
- मुझे देव ! तुम बतादो, कैसे तुझे रिझाऊँ,
- मुझे नाथ! तेरी मुखछवि सदा भाती है, भाती है,
- मुणिन्द मोरा
- मुदिर! अरे! क्यों इठलाते हो?
- मुनि जीवन सदा जगाओ
- मुनि संयम राता
- मुनिवर मधुकर स्वाम गण में गौरव पाया जी।
- मुनिवर! तुम्हारी देख विदाई, आंखों में सबके आज रुलाई।
- मुर्गा बोल रहा कुकड़ूं कूं।
- मुस्काती मुद्रा अभिनंदन
- मूंघो मिनख जमार
- मूरख लखजा रे
- मूर्छा की ग्रंथि खुलेगी
- मृगापुत्र
- मृत्यु ही सत्य
- मृदु वाणी
- मेरा मन स्थिर हो जाए, भटकने न पाए,
- मेरी आंखों में मूरत तुम्हारी प्रभो।।
- मेरी बीमारी
- मेरी भावना
- मेरे गुरुवर का शुभनाम, जग में जयकारी,
- मेरे तो संघ की महिमा सकल जहान में है,
- मेरे दिल की हर धड़कन में गूंजे गुरु की आवाज,
- मेरे दिल की हर धड़कन में गूंजे गुरु की आवाज,
- मेरे नयनों में बसते सदा महावीर है,
- मेरे प्राण पियारे गुरु तुलसी, इस मन मंदिर में आओ तुम,
- मेरे मन के दीप! जलो रे
- मेरे मन मन्दिर के स्वामी, तेरी पद रज मिल जाये,
- मेरे मन मन्दिर में आओ, मेरी नैया पार लगाओ,
- मेरे मन मन्दिर में बिठाऊं
- मेरे मन! तूं तज भटकना मान ले कहना,
- मेरे सतिवर करो स्वीकृत
- मेला है ओ s s s, मेला हे ओ s s s
- मैं अगाया गीत गाऊं
- मैं तेरे गुण प्रभु कैसे गाऊं, तूं ही है आधार मेरा,
- मैं तो गुरुवर! तेरे गीत गाऊं,
- मैं तो पल-पल गाऊं रे
- मैं तो प्रभुवर रा गुण गाऊं रे
- मैं तो बचपन री बातां नै याद करूं,
- मैं महफिल से दूर तुम्हारी
- मैं शीश झुकाता हूँ, मुझे नाथ ! निहारो तुम,
- मैं हूँ दीप, दिवाकर तुम हो
- मैत्री भाव जगाए जा, सबका मन सरसाए जा,
- मोरा माता के प्यारे, आदीश्वर जग
- मोह माया का फंदा
- मोहक सा मुस्काता मुखड़ा है ये तेरा
- मौत यदि याद दिलाए, तो तुझे याद आए,
- मौन की महत्ता
- मौन दिवस
- मौन मंत्र है सघन तंत्र, इससे मानव पूजा जाता।
- मौन मेरी साधना चलती रही, चलती रहे।
- मौसम आज मन भावन, खुशी रो मेहलो बरसै
- मौसम सुहानी मन भाई,
- म्हांनै घणो सुहावै जी
- म्हांनै याद घणा आवै, तेरापंथ रा धणी,
- म्हांनै शिविर साधना, पल-पल मन भावै।
- म्हांरै गण रो प्रखर प्रकाश,
- म्हांरै गांव में, मोत्यां री देखो बिरखा आई सा।
- म्हांरै हिवडै रा मेहमान, गुरुवर आया आंगणै।
- म्हारा गुरुवर प्यारा! भक्ति भरी म्हारी, झेलो वन्दना,
- म्हारी आख्यां नै गुरु महाश्रमण री मूरत भावै रै, म्हारी आख्यां नै,
- म्हारी आख्यां में बस ज्याओ,
- म्हारी एस-सेलड़ियां
- म्हारी चेतना में प्रभु रो नाम है,
- म्हारी जीभडी नै प्यारो-प्यारो लागै तुलसी नाम,
- म्हारे आंगणिये
- म्हारै अंतर में ज्योति
- म्हारै आंगण लागी रंगरली, मुख-मुख में मीठी मिसरी डली,
- म्हारै आंगणै पधारो
- म्हारै मन-मन्दिर में प्रभु महावीर है
- म्हारै मनड़े रो भय भाग्यो है,
- म्हारै श्रद्धा रा आधार जी,
- म्हारै संघ में मर्यादा ही है जीवन आधार,
- म्हारै सांस-सांस में बोलै
- म्हारै हियड़े बसै जी, म्हारे हियड़े बसे,
- म्हारै हिरदै में बसै तुलसी प्रभु रो नाम
- म्हारै हिवड़ै रा हार, बसग्या सुरगा मझार
- म्हारो अभिवादन स्वीकारो
- म्हारो मन पारस प्रभु रै चरणां में लाग्यो,
- म्हारो रोम रोम हरसावै