भ से गीतिकाएँ
113 रचनाएँ
- *भावों पर टिकी हुई है, हर मानव की जिन्दगानी,
- भक्ति की महत्ता
- भक्ति दा रंग
- भक्तों के भगवान् भिक्षु लो वन्दना मेरी,
- भगवन् ! मन मंदिर में आओ,
- भगवन्! मुझे बता दो इतना कि तुम किधर हो,
- भगवन्! हम चल आये तेरे द्वार पे,
- भगवन्! हम चल आये तेरे द्वार पे,
- भगवन्! हृदय की अर्ज सुनाओ,
- भगवान ॠषभदेव
- भगवान महावीर
- भगवान महावीर के प्रति
- भज मन भिखू-स्याम
- भज ले प्रभु का नाम, काम बन जाये,
- भजन कर प्यारे मिलेगा शिव धाम,
- भजन करो भगवान रो
- भजिए निशदिन कालु गणिन्द
- भजिये भविजन! भिक्षुगणी गणनायक तेरापंथ-धणी।
- भजो भवि! भिक्षुगणी,
- भटक रहा कब से तूं इन्सान,
- भटकन में युग बीते
- भटके हुए लोगों को सही बताओ,
- भलो थे अनशन ठायो रे!
- भव से पार
- भवि! तुम चेतो रे
- भस्म हुई अगणित कन्याएं
- भादूड़ी तेरस नै आज, सुरग सिधाया हा गणताज,
- भाया! मौके पर इं जीभलड़ी ने वश में राखज्यो,
- भारत के लोगो! जागो तुम जीवन में संयम अपनाओ।
- भारत के सेनानी,
- भारत भू पर दिव्य ज्योति ले चमका बन ध्रुवतारा था,
- भारी अनशन धारयो जी क, भारी अनशन धारयो जी।
- भारीमाल गणी
- भारीमालजी स्वामी री म्है जावां बलिहारी,
- भाव तपस्या
- भाव-सरिता
- भावना भाऊं प्रातः शाम,
- भावना यही सदा, मैं करूं सबका भला,
- भावना, यह मेरी, मैं बढूं सत्य राह पर,
- भावों की गर्मी
- भावों की सांकल
- भाषा शमिती सिखावै रे
- भिक्खू नाम री मैं माला फेरूं भोर—भोर में,
- भिक्षु का नाम प्यारा, विश्व का है उजारा,
- भिक्षु का नाम-निराला
- भिक्षु का सहारा
- भिक्षु की अभिवन्दना हम कर रहे
- भिक्षु की आज गाएं, मंगलमयी ऋचाएं।
- भिक्षु की गौरवमयी गाथा सदा गायें,
- भिक्षु के चरणों में हम सब वन्दन बारंबार करें
- भिक्षु के दर्शान
- भिक्षु के प्रताप से
- भिक्षु को आंगण में
- भिक्षु को वन्दन बारम्बार ।
- भिक्षु को सांसों में बसा लो
- भिक्षु गुण-स्तवन
- भिक्षु चरमोत्सव
- भिक्षु जीवन गाथा
- भिक्षु नाम की विजय पताका हम जग में फहरायेंगे,
- भिक्षु नाम चमत्कारी।
- भिक्षु बाबा का स्तवन शुभ भावना से सब करें हम।
- भिक्षु बाबा! लो हमारी वन्दना
- भिक्षु भिक्षु नाम स्यूं, लागी म्हांरी प्रीत।
- भिक्षु भिक्षु बोलो, सब नर नार,
- भिक्षु भिक्षु भजन हो, तन से, मन से और वचन से
- भिक्षु भिक्षु सब गाएं
- भिक्षु भिक्षु ही जबां पर नाम है
- भिक्षु मेरे दिल के राम
- भिक्षु म्हारै प्रगट्या जी
- भिक्षु म्हारै मन रम्या जी, भिक्षु रो आधार ।
- भिक्षु शासन की महिमा हम गाएंगे
- भिक्षु स्तुति
- भिक्षु स्वाम ज्योतिर्धाम पावन नाम
- भिक्षु स्वाम, मिक्षु स्वाम,
- भिक्षु स्वामी की संपदा
- भिक्षु स्वामी जी जगत में नामी जी
- भिक्षु स्वामी! अन्तर्यामी!
- भिक्षु है इमरत रो झरणो
- भिक्षु-भिक्षु जपतां टूटै करमां रा बन्ध,
- भिक्षु-भिक्षु बोल तूं
- भिक्षु-भिक्षु-भिक्षु म्हारी आत्मा पुकारे
- भिक्षुक का अभिनन्दन क्या ?
- भिक्षुगण अनुशास्ता रायचन्द गुरुराज!
- भिक्षुशासन का उज्ज्वल इतिहास,
- भिक्षुस्वामी अंतर्यामी
- भिक्षुस्वामी रो सुहाणो
- भिक्षुस्वामीजी ! शरण तुम्हारी आया।
- भिक्षू गुरु! तारो, तारो तारो तारो।
- भिक्षू जशधारी,
- भिक्षो! शासन आपरो, चाढ्यो शिखरां आज,
- भिखण जी रो शासन लागै है प्यारो,
- भिखण रा गुण गावां, स्वाम री मूरत ध्यावां,
- भीखण जी स्वामी भारी मर्यादा बांधी
- भीखण बाबा की
- भीखण री मूरत भावै, जपतां मनड़ो हरसावै
- भीखण री श्रद्धा
- भीखणजी स्वामी रे चरणां वंदना बारम्बार है।
- भीगी हुई मन दीप की बाती, लौ अब जलादो भगवान रे,
- भीतर का बन्धन टूटेगा मेरा,
- भूल नहीं राष्ट्र का गौरव।
- भूल रहा मानव न्याय धर्म को भूल रहा,
- भूलो मन भमरा कांई भम्यो
- भेट भवि चरण ले
- भैक्षव शासन है जयकारी, इण री महिमा न्यारी है।
- भैक्षवगण नंदनवन में, तुलसी युग वरदाई हो
- भैक्षवशासन नन्दनवन की सुषमा शिखर चढ़ाएं हम।
- भोग में क्यूं राच्यो प्राणी,
- भोजन संयम दिवस
- भोर समै भजूं भिक्षुगणी,
- भोर-भोर उठ कर प्रभू नै सुमरलै
- भ्रष्टाचार
- भ्रांति मिटा क्रांति कर
- भ्रान्ति