अ से गीतिकाएँ
104 रचनाएँ
- *अहिंसा भगवती की हम पूजा करें,
- अंतर की शुद्धि
- अंतर भावों में
- अंधियारो चिहुं ओर हो, फैलायो धरम प्रकाश,
- अक्षय अमर विभव है
- अक्षय तृतीया
- अक्षय तृतीया
- अगर तुम चाहते हो
- अचानक छोड़ गये
- अच्छा बच्चा उसे कहें हम।
- अच्छे मानव कहलायेंगें
- अजपा जप यह दिन-रात चले,
- अजब गजब की मस्ती
- अजब शान हैं
- अज्ञान का तिमिर
- अणुव्रत
- अणुव्रत का नया स्वर
- अणुव्रत को फैलाएं हम
- अणुव्रत गीत (1)
- अणुव्रत गीत (2)
- अणुव्रत दीप
- अणुव्रत सूर्य उगाया है।
- अणुव्रत है सोया
- अणुव्रत—दिवस
- अद्भुत यम की मार
- अधरों पे रखते सदा
- अध्यात्म का आकाश
- अनजानी राहों के राही
- अनमोल ओ जमारो क्यूं तूं व्यर्थ गमावै रे
- अनमोल जिन्दगी
- अनमोल तुम्हारा यह जीवन, इसकी कीमत पहचान
- अनशन गीत
- अनशन गीत
- अनाथी
- अनुनय सुन लो भगवान्! सत्पथ पर बढ़ता जाऊं,
- अन्तर् भावना
- अन्तस्-चक्र घुमाओ
- अन्तिम बाजी
- अन्याय सहो मत
- अपणे घर में
- अपना करो सुधार
- अपना मन अपने को छलता।
- अपनी आत्मा में स्थित होकर जिनवर के गुण गाएं।
- अपनी करणी पार उतरणी, करना जग में भलाई,
- अपने को पहचान रे,
- अपने घर में
- अपने जीवन का अपने से बढ़कर नहीं कोई रखवाला
- अपने जीवन को ऊंचा उठाये जा,
- अपने जीवन को संभाल पल-पल सफल बना ले रै,
- अपने जीवन को संभाल,
- अपने भीतर झांक
- अपने में जरा निहारो तो
- अपने सद् आचरणों से हम अन्तर को चमकायेगें
- अपने सारे काम करने
- अपने से अपना कल्याण
- अपेक्षा महावीर की
- अब जाग सयाने निद्रा तज, अवसर तेरे घर आया है
- अब जागो वीर सपूतों! युग तुमको खड़ा पुकारे
- अब तो जाग
- अब तो पधारो भगवन्!
- अब तो संभल रे, ओ मेरे मन,
- अब दोनों हाथ उठे हैं, मंजिल पर चरण बढ़े हैं।
- अब नर भव सफल बनाना है।
- अब मांयली थे आंख नै उघाड़ल्यो कनी
- अब म्हारै समकित दीप
- अभिनंदन नाथ तुम्हारा
- अभिनंदन में ले पूजा थाली, आई भोर रुपाली।
- अभिनंदन शतशत वंदन, लो श्रद्धा भरा समर्पण
- अभिनन्दन
- अभिनन्दन बार हजार
- अभिनन्दन में
- अभिमान
- अभिषेक दिन आयो, मन में उमंग ल्याओ
- अभेद
- अमर गीत
- अमर न कोई रह पायेगा
- अमर बनकर यहां कोई कभी रहने नहीं पाता,
- अमर स्पन्दन
- अमृत महोत्सव अभिवन्दना
- अमृत महोत्सव का अभिनव अवसर आया।
- अमृत वाणी
- अमृतपुरुष हैं अवढ़रदानी
- अयि नेम कुवर
- अरणक मुनि
- अरिहत देव को वंदन
- अरे धार्मिको
- अरे मन, अपने को संभाल,
- अरे मन! दृढ़ता धारी रै,
- अर्ह वन्दना
- अर्हत् वाणी के पथ पर चलकर, महावीर मुझे अब बनना है ।
- अलख जगावां
- अलबेलो शासण थांरो – स्वर्गा सी है छटा निराली
- अवसर ही अवसर है
- अविरल गति से चलते जाएं, प्रभु के बतलाये वचनों पर,
- अश्रुपूरित नयन
- असल ठिकाना
- अस्थिर संसार
- अहा! अभिनव उच्छव छाए, तेरापंथान में।
- अहिंसा का वह गायक था
- अहिंसा की चेतना का जागरण हो विश्व में,
- अहिंसा गीत
- अहिंसा जीवन को बदले
- अे गण देवता थांरै में करां वंदना,
- अै दो सूरज दो चांद साथ उदियाया।