स से गीतिकाएँ
285 रचनाएँ
- *संयम जीवन में लायें, स्वस्थ नागरिक कहलायें,
- *सद्गुण सब साकार जहाँ पर, श्रेष्ठ वही इन्सान है,
- *सद्गुरु का आह्वान, सुनो दे ध्यान,
- संकटमोचन संघ
- संकल्प हमारा साथी है,
- संगठन का दिव्य दीवट, दीप जीवन का जलाऊं।
- संघ -सुषमा विकसाएं हम।
- संघ अपना अब बने, साकार सत्य प्रयोगशाला।
- संघ उपवन में निहारो आयो नयो बसन्त
- संघ का गौरव गाएं हम
- संघ की जरूरत है
- संघ की नीवें गहराएं।
- संघ की शान बढाएं हम
- संघ के उन्नायक महाप्रज्ञ गुरुराज।
- संघ गीत
- संघ गीत
- संघ भक्ति
- संघ समन्दर
- संघ हिमालय के शिखरों पर
- संत चरण गंगा की धारा,
- संत भीखणजी रो समरण
- संतां री वाणी, सुणल्यो लगाकर ध्यान,
- संतां। शासण ओ स्वामीजी रो,
- संतों का कैसा स्वागत ?
- संतों की संगति
- संथारा
- संथारो साचे मन धारयो,
- संभल-संभल चल हर पल मनवा,
- संभळकर चालजै रे, है टेढ़ो जग व्यवहार,
- संभालो अपने आपको, तो। व्यवहार,
- संयम का सन्देश महोत्सव
- संयम ही जीवन
- संयम है जीवन रो अमरित,
- संयम: खलु जीवनम्
- संवत्सरी दिवस
- संविधान : अनुशासन की पहचान
- संस्कार
- संस्कार बदलो सफल बनो
- संस्कारी बनो
- सकल जगत् में कहीं न मुझको सच्चा प्यार मिला ।
- सक्षम है
- सचमुच में भगवान हो
- सच्चा इन्सान
- सच्चाई को लगती फांसी
- सजग बनो
- सजग रहो अपने जीवन में।
- सजग हो आत्मानुशासन को जगाएं हम।
- सतत मेरे धर्म
- सतत विकासी श्रमण-संघ-संस्कृति का एक उदय हो।
- सतिवर के चरणों में
- सतिवर क्यों तुम जाते
- सतिवर जाते कहां
- सती राजीमती
- सती सुभद्रा
- सत् संगत की महिमा निराली बड़ी
- सत्गुरु दी सीख
- सत्य की विजय
- सत्य के खातिर समर्पित प्राण है।
- सत्य को पहचानो
- सत्य धर्म की जय
- सत्य समता के तटों से, जो बही उन्मुक्त धारा।
- सत्य से मंजिल
- सत्यवादिता सझै न थांस्यूं तो रहणों चुपचाप है
- सत्संग का महत्त्व
- सत्संग से मुक्ति
- सत्संगत
- सत्संगत की महिमा अपरम्पार है।
- सत्संगत में जो आता है, वह पग-पग मंगल पाता है।
- सदा सबेरे नित उठ फेरूं भिक्षु नाम की माला,
- सदाचार का अमृत
- सदियों से जो चमक रहा वसुधा तल पर बन कर ध्रुव तारा,
- सद्गुण अपनाना, संतों का यह फरमाना,
- सद्गुणों से प्यार हो, तो सब सुधार हो।
- सद्गुरु की संगत
- सद्गुरु! एक तेरा नाम, मेरे मन को भाये,
- सननननन रैली चली
- सन्तजनों के पद पंकज में नित उठ शीश झुकाऊँ मैं,
- सन्ता! शासण ओ स्वामीजी रो
- सन्तां रा खुल्ला है बारणां
- सन्तो! भैक्षव शासन में नव्य विकास चाहिए।
- सपने तुम्हारे वे, लगते अनमोल,
- सपने सब किसके फले, कोई भी हो क्यों ना भले,
- सपनों का संसार
- सफल जीवन
- सब धर्मो में बतलाई रे तप री शक्ति महान
- सब धर्मों का सार
- सब स्यूं प्यारो, सब स्यूं न्यारो, सांवरियै रो नाम
- सबल सहारा धर्म का
- समझता हूं समझ न पाता
- समता कद आसी
- समता का सागर लहराये,
- समता की सरिता
- समता बड़ा तीर्थ
- समता रा सागर
- समता री सूरत पन्ना सती सुजान।
- समता रो पथ अपणाले तुं,
- समन्वय
- समय ओ बीत ज्यावैलो
- समय की कीमत
- समय की पदचाप
- समरां बाबै रो नित नाम
- समर्पण है क्या इसका नाम ?
- समाई सुखदाई हो
- समाधि गीत-भावै भावना
- समीकरण
- सम्प्रदाय की दीवारों ने बांट दिया है इन्सानों को,
- सम्बन्ध
- सम्यक्त्व
- सरल थारो सारो बणा रै व्यवहार,
- सरलमना हो प्रात: सायं नित प्रतिक्रमण करूं,
- सरस्वती की ओ संतानों! वसुधा तल के ओ प्रहरी!
- सर्वाधिक संयम-सौरभ सुखकार है।
- सर्वोत्तम दिन साधना का
- सहज सादगीमय्य जीवन हो।
- सहन करो सफल बनो
- सहनशीलता
- सहने वाला गौरव पाता।
- सहारे तुम्हारे त्रिशलादुलारे, लाखों ने नैया पार उतारी,
- सांवरा स्वामी जी
- सांवरा! हो सांवरा! स्वामीजी! स्वामीजी!
- सांवरिए री ऊर्जा में, नित न्हावा रे, म्हांरो सांवरियो!
- सांवरिया ! थोरै नाम रो, है म्हानै आधार,
- सांवरिया थोरै संघ स्यूं लागी म्हांनै प्रीत
- सांवरिया भिखणजी ओ, करां थांरी ध्यावना,
- सांवरिया मूरत दिखादे रे,
- सांवरिया रो नाम नित ध्यावां म्है, नाम नित ध्यावां म्है,
- सांवरिया स्वामी जी
- सांवरिया स्वामी जी! आवो
- सांवरिया स्वामी! थांरो ही भगतां ने है आसरो,
- सांवरिया! तेरे संघ की शोभा दुनिया में है छाई,
- सांवरियाऽऽऽऽ तेरे चरणों में प्रणाम है, मेरा प्रणाम है,
- सांवरिये भरग्यो रे उजास...
- सांवरिये रो नाम लियां काम सरैला – रात री अन्धेरी में जो जाप करैला
- सांवरियो म्हारै रूं रूं में रमग्यो – मिश्री में मीठास बण्यो
- सांस की टूट ज्यासी लड़ी,
- सांसा रो खजानो थारो रीतै रै,
- सांसों का चयन
- सांसों का है क्या विश्वास, आए ना आए,
- सांसों की वीणा का गुंजे सरगम,
- सांसों की वीणा को गीत सुहाता है,
- साच नै आंच नहीं है।
- साथी पंथ बनाना होगा
- साथी प्यारे सुख में इतना क्यों लुभाता है,
- साथी से
- साथी! तब तक बढ़ते जाना, मंजिल जब तक नहीं हाथ लगे,
- साधक से
- साधना के उच्च शिखरों पर विजय अभियान हो अब।
- साधना गीत—1
- साधना गीत—2
- साधना पथ पर प्रगति कर चेतना अपनी जगाएं
- साधना में चित तूं लगावै क्यूं नी रे,
- साधना में मन लगाना चाहिए।
- साधना री कसौटी
- साधना रो शुद्ध मारग
- साधना वेदी पर संयम दीप जयायें हम,
- साधना ही शान्ति का आधार है।
- साधुओ! ऐ साधुओ! मर्यादा,मर्यादा मूल्य बढ़ाएं रे।
- साधुवंदना
- साध्य स्वयं साकार हो जया
- साध्वीप्रमुखाएं प्रवर, तेरापंथ की शान,
- सापेक्षता
- सामंजस्य
- सामायिक दिवस
- सामायिक दिवस
- सामायिक रो सार, समता भाव धरै जी, भाव धरै।
- साम्ययोग री शिखर
- सार नहीं तो सब निस्सार
- सार स्वल्प
- सारे जगत् में घूम लूं मैं
- सारे संसार को सन्मार्ग दिखाने वाले, मुझे भव पार करो,
- सावंरियै रो प्यारो लागै नाम,
- सिंवर्या महामन्त्र नवकारजी, नर जन्म-जन्म सुख पावै,
- सिद्धार्थपुत्र, शत-शत प्रणाम
- सिद्धि का वरदान
- सिर मौत खड़ी
- सिरियारी का पुण्य धाम यह, लगता है सुहाना।
- सिरियारी का संत महान्, ओम् जय भिक्षु भिक्षु अभिधान ।
- सिरियारी रे कण—कण में, चहुँ दिशि में गिरी उपवन में,
- सिरियारी रो संत
- सिरियारी रो संत
- सिरियारी वाले
- सिरीयारी वाला भिक्षु हम सब का नाथ है,
- सीखो अनुशासन में रहना।
- सीखो बच्चो, प्रेक्षाध्यान
- सीमंधर भगवान
- सीमंधर भगवान
- सीमाएं
- सुख का सोता
- सुख के साथ
- सुख के साथी
- सुख पाना यदि है जीवन में।
- सुखकारण भवियण!
- सुखमय जीवन
- सुगणा! ध्यावो रे,
- सुगुरु को वंदन शत-शत बार।
- सुगुरु पिछाणो इण आचारे
- सुजना! तेरापथ री रीत प्रीत धर सांभलों रे लोय।
- सुजना! दीपां-नंदन शिवपुर-स्यंदन समरिये रे लोय
- सुण ज्ञानी जीवड़ा क्यूं तूं भूल्यो है अपणै भान नै,
- सुण तूं बावली-२ जीभडली संभल कर बोल,
- सुण सुण रे चेतन! मानव तन री कीमत नै आंक तूं,
- सुणल्यो थे किसान भाई ! गुरु री शिक्षा हितकारी,
- सुणल्यो श्रावकजी भावां नै राखीज्यो नित उजला,
- सुणिये भवि! भल भाव स्यूं रे, भिक्षु लिखत महिमाण।
- सुणो श्रावकां ध्यान स्यूं अवसर री आवाज,
- सुधा किसी को मिल पाए तो
- सुन जरा कट जाये
- सुनकर, यह मेरा स्वर, दिल के आग्रह को दो हर,
- सुनाएं फिर से वह सिंहनाद।
- सुनें कहानी परमपुरुष की, तेरापंथ की,
- सुनो अहिंसा का आह्वान
- सुनो कहानी कनकप्रभा री
- सुनो प्यारे प्रभुवर, भाव हृदय के,
- सुनो बालकों! एक कहानी,
- सुनो भगवान्! मेरे अरमानरे, दो ध्यान मिट जाए अब अज्ञान,
- सुनो लगाकर ध्यान, सुगुरु की वाणी,
- सुमिरन प्रभु का कर ले, मनवा!
- सुर नर जिणने शीश नमावै,
- सुहाता नहीं मुझे व्यवहार
- सूना-सूना लगता संसार, भगवन्! बिना आपके,
- सूरज आया है, उजली छाया है, मिलेगा जग को उजियाला,
- सूरज जैसा ओज है
- सेवा करो सफल बनो
- सेवा का दो अवसर आए द्वार तुम्हारे—हम द्वार तुम्हारे।
- सो ही सयाणा! नेम चितारै
- सोते—उठते, खाते—पीते होठों पर इक नाम,
- सोना रूपा रो रवि (स्वागत-गीत)
- सोने स्यूं घड्यो है, दिन आज रो।
- सोया गफलत में क्यों सयाने कीमती यह समय खो रहा,
- सोलह सतियों का गीत
- सोलह सती स्तवन
- सोवण में जमारो बीत्यां जाय, अब तो जाग रै।
- सौभागी संघ हमारा
- सौभाग्य घड़ी जिन-शासन की,
- सौरभ थांरे संघ री, पूगी क्षितिज रे बीं पार।
- स्थापना दिवस
- स्थिर बन सामायिक कर लो
- स्नेह
- स्मृति-रंग
- स्रष्टा से
- स्वच्छ भारत गीत
- स्वप्न संसार में भाई
- स्वयं का ध्यान लगाऊंगा
- स्वरूप चिन्तन
- स्वर्ग तरसता धरती खातिर
- स्वर्णिम अवसर
- स्वस्थ चिंतन
- स्वागत
- स्वागत गीत
- स्वागत गीत
- स्वागत वेला
- स्वाध्याय दिवस
- स्वाध्याय दीपक
- स्वाध्याय से आत्मलीनता
- स्वाध्यायी बण भीतर झांको, भीतर झांको,
- स्वाम साचा
- स्वामी जी रै चरणां, तन-मन अर्पण करियो रै, करियो रै।
- स्वामी पंथ दिखाओ जी
- स्वामी भीखण जी रो नाम, आसी भव-भव मांही काम
- स्वामी भीखणजी कद स्यूं, म्हें बाट निहारां
- स्वामी भीखणजी री आण,
- स्वामी भीखणजी रो नाम आठूं याम ध्यावां।
- स्वामी भीखणजी-3,
- स्वामी भीखणजी!
- स्वामी! कौन-सा सुरीला गीत
- स्वामीजी का नाम हमारे लिए सहारा है
- स्वामीजी थांरै संघ री महिमा महकावै है
- स्वामीजी थांरो संघ निरालो रे गावां यशोमय गान
- स्वामीजी थारी साधना रो पार न कोई पायो।
- स्वामीजी थारै शासन में मौज उड़ावा हां
- स्वामीजी म्हानै दरसण दीन्हाजी
- स्वामीजी राह दिखावो
- स्वामीजी रै नाम री सब रोज फेरो माळा
- स्वामीजी रो नाम म्हारै मनड़ै में रमग्यो,
- स्वामीजी रो शासण, म्हांनै घणो सुहावै जी।
- स्वामीजी रो शासन म्हारै हियड़ै रो हार है।
- स्वामीजी! आवो देखल्यो
- स्वामीजी! एकर तो देखो
- स्वामीजी! झणण झणण
- स्वामीजी! थांरी साधना री
- स्वामीजी! थांरै चरणां री बलिहारी जावां हां,
- स्वार्थ का संसार
- स्वार्थ के साथी
- स्वार्थी दुनियां
- स्वार्थों का बलिदान करो तुम।