ब से गीतिकाएँ
80 रचनाएँ
- बंधन और मुक्ति
- बचपन को ऐसे जीयें हम।
- बचपन लगता है मनभावन।
- बच्चे हों संस्कारी।
- बच्चे! चाहे शक्ति बढ़ाओ।
- बच्चो, कभी न करो प्रमाद ।।
- बच्चो, तुम गुणवान बनो
- बच्चो, दो संगत पर ध्यान
- बच्चो! प्रतिपल बढ़ते जाना,
- बच्चों का जीवन निर्मल है
- बच्चों की जीवन फुलवारी
- बच्चों, है यह भारत देश
- बच्चों! नकल कभी मत करना।
- बच्चों! प्रण करलो निज मन में,
- बच्चों! सीखो करना संयम,
- बजी झणणण थाली, क छाई खुशहाली
- बड़ा चमत्कारी
- बड़ी साधुवंदना
- बढ़ चलो, बन्धुओ! मंजिल पर
- बढ़ते जाना तूं हर पल, खुद चल आयेगी मंजिल,
- बढ़ते जायेंगे कदम, इस दिन दूर हटेगा तम,
- बढ़ो राही, बढ़ो राही,
- बदलता रहता सभी कुछ
- बदलाव न आया
- बदले जीवन घारा
- बन विनीत रहना जीवन में।
- बने जैनों की नव पहचान,
- बन्दे तजदे फंदे आखिर परभव में जाना
- बरसाना अमृत की
- बलिदानों की कहानी
- बलिहारी सांवरिया
- बस, बढ़े चलो मंजिल की ओर
- बसता निर्माण विनाशों में
- बसा है नाम तुलसीराम, श्वास हर एक धड़कन में।
- बह रहा, बह रहा, बह रहा रे,
- बह रहा, बह रहा, बह रहा रे, समय पवन ज्यों बह रहा रे,
- बहती यह जिन्दगी रूक न जाए,
- बहनों अब आगे आओ, अपना पुरुषार्थ जगाओ।
- बहिनों। अब आगे आओ,
- बांध सको तो बांधो
- बाजार
- बादल बरसे उमड़ घुमड़कर।
- बादळियो आंखड़ल्यां में
- बाबा ऋषभ एकला,
- बाबा भिक्षुस्वामी की शुभ स्तवना करते हैं।
- बाबे के गुण गाएंगे, भिक्षु को बुलाएंगे,
- बाबे रे नाम रो साचो सहारो रे,
- बाबै ने मनावां
- बाबै भिखण जी रो नाम जपूँ भोर—भोर में,
- बाबै भिखण रे चरणां में नित उठ शीश झुकावां,
- बाबै भिखण रै गण आज, छायी देखो रंगरलियां,
- बाबै मीखण की जग में, महिमा है भारी,
- बाबै रो नाम म्हांनै प्यारो-प्यारो लागै रे,
- बाबै रो प्यारो नाम, बाबो श्रद्धा रो धाम,
- बाबै रो शरणो बड़ो, भक्तां रो आधार है,
- बाबै रो, नाम बड़ो है प्यारो ओ,
- बाबो उपकारी, जावां बलिहारी,
- बार बार अनुचित चित है खाना।
- बारहवां व्रत
- बाल शिविर गीत
- बाल संस्कार
- बालू नंदन ने वंदन सौ-सौ बार
- बावला! क्यूं तूं राच्यो है मायाजाल में,
- बावलो बण्यो है क्यूं तूं इण तन धन में,
- बाहुबली भैया से बहिनें पुकारे,
- बिना श्रम के जिन्दगी में, सफलता मिल नहीं सकती,
- बीच भंवर में नैया
- बीत रही एक-एक लाखीणी घड़ी,
- बीती जाए रे, उमरियां बीती जाए रे,
- बीतै बीतै बीतै यूं ही उमर थांरी बीतै रे,
- बीत्यो इम पखवाड़ो जावै
- बीस विहरमाण
- बोते जाओ जीवन में
- बोलो ऋषभ देव, बाबै री, सगला जय बोलो।
- बोलो जय वीरा, जय-जय महावीरा,
- बोलो बच्चो, मीठे बोल
- बोलो महाश्रमण नै खम्मा धणी,
- बोलो हिलमिल जय
- बोलो-बोलो गुरु की जय बोलो,
- बोवे सो काटे