त-थ से गीतिकाएँ
157 रचनाएँ
- तको दूसरों का न सहारा।
- तन धन रो कांई रे गुमान करै
- तप का रंग
- तप का स्वागत सौ-सौ बार
- तप का है ऊँचा स्थान
- तप का है तेज निराला
- तप की खरी कमाई
- तप की गंगा में पाप बहाओ
- तप की गरिमा
- तप की ज्योति में तपकर
- तप की धार
- तप की निर्मल धारा
- तप की महिमा
- तप की शक्ति महान्
- तप की सौरभ
- तप गंगा
- तप घुंघरु बाजै रे
- तप पग-पग। मंगलकारी
- तप पावन तीरथ
- तप में कदम बढ़ाओ
- तप में जुट जाओ
- तप में तेज गजब रो भाई!
- तप में समता
- तप री गंगा में
- तप री महिमां भक्ति भाव स्यूं म्है नित गावां रे, गावां रे
- तप री शक्ति महान
- तप रे क्षीर समंदर मांहिं, आओ न्हावां—आपां!
- तप रे झूलै में
- तप रो काम करारो।
- तप शक्ति बेजोड़
- तप सुखकारी मंगलकारी हो तप री महिमा अति भारी
- तप स्यूं आतमा में भारी बळ आवै
- तप है मंगलकारी जी
- तपःपूत चरणों में वन्दन
- तपसण! थांरे जीवन री उजली भोर है
- तपसी संतां री जावां हां बलिहारी,
- तपस्या करणै स्यूं आ काया, कंचन सी बण ज्यावै है।
- तपस्या करल्यो रे
- तपस्या जीवन रो श्रृंगार
- तपस्या निराली रे
- तपस्या री गंगा
- तपस्या री प्रेरणा
- तपस्या री महिमा देखो अपरंपार
- तपस्या रो बादळियो
- तपस्या रो हेलो
- तपस्या से होता शोधन।
- तपो तुम सहस्रांशु समान
- तम भरी जिन्दगी की राहों में,
- तमाशा लग रहा मुझको जगत मानो मदारी का,
- तास रा पत्ता
- तिलक गुरुराज करयो
- तीन चित्र
- तीन बोलां करी
- तीन भाव
- तीन मनोरथ
- तीन रुपक
- तीन लोक के नाथ महाश्रमण अब तारो ना
- तीर्थ
- तीर्थंकर स्तुति
- तीर्थंकर स्तुति
- तुम अंतर्यामी हो
- तुम ज्योति बांटने आए हो..........
- तुम ज्योति-पुंज-बन आए।
- तुम मेरे हो जिगर
- तुम हमारे, हम तुम्हारे
- तुम हो चिन्मय
- तुम हो पावन
- तुम हो महाप्राण
- तुमने अपने नयन न खोले
- तुमसे लागी लगन
- तुम्हीं बताओ भेंट करें क्या
- तुम्हे शीश झुकाते हैं नाथ! हम तुमको मनाते हैं,
- तुम्हें वन्दन करता हूँ, भक्ति रस से भरा,
- तुलसी का नाम सुहाए, तुलसी से लय जुड़ जाएं।
- तुलसी की कृति हो तुम
- तुलसी की देन
- तुलसी के अवदानों का, अब कैसे मूल्य चुकाएं।
- तुलसी गुरु के चरणों में शत नमन हमारा है
- तुलसी जन्मोत्सव
- तुलसी जय तुलसी जय तुलसी जय
- तुलसी तुम्हारा नाम हम दिल में सदा बसाएं
- तुलसी तुलसी जय बोलो।
- तुलसी तुलसी नाम ललाम।
- तुलसी तुलसी भजले तूं
- तुलसी तुलसी समरल्यो तुलसी हिवड़े री कोर
- तुलसी तूं जन जन का प्यारा, चमक रहा बनकर ध्रुवतारा,
- तुलसी तेरापंथ रो ध्रुवतारो – तुलसी तेरापंथ रै, आकाश रो ध्रुवतारो
- तुलसी नाम बड़ा है प्यारा,
- तुलसी नाम बड़ो गुणकारी
- तुलसी नाम री माळा नित फेरो सुबह और शाम
- तुलसी नाम स्यूं म्हें तर ज्यावां
- तुलसी महाप्रज्ञ की प्रतिकृति
- तुलसी महिमा
- तुलसी रो, प्राणां स्यूं भी प्यारो नाम तुलसी रो,
- तुलसी सहारो साचो तुलसी ही त्राण हो
- तुलसी स्तुति – तुलसी तुलसी ध्यावां, तुलसी तुलसी गांवां
- तुलसी स्वामी रे!
- तुलसी है प्राणां स्यूं प्यारो
- तुलसी-तुलसी ध्याऊं, तुलसीमय बन जाऊं।
- तुलसी-तुलसी नाम, तुलसी-तुलसी नाम हमको
- तुलसी-महाप्रज्ञ युग
- तुलसी! तेरी सुयश गाथा जे भुला नहीं पायेगा,
- तू आयो है
- तू मन-मन्दिर में आ जा,
- तूं जैसा व्यवहार करेगा।
- तूं तो झुकज्या रे, ओ ऽऽऽ तूं तो लुड़ज्या रे,
- तूं तो मिनख जमारो पायो भाम स्यूं
- तूफानां में भी नहीं झुक्यो, बीं महापुरुष नै नमन करां,
- तेरपथ रो भाग्य-विधाता,
- तेरस री है रात
- तेरा कल्याण है तुझसे
- तेरा कौन—सा है मन्दिर, जरा सामने आकर बतलादे,
- तेरा जीवन सुख से भर जाए,
- तेरा मन मन्दिर बन जाये,
- तेरा यों ही बीत न जाये यह जीवन,
- तेरापंथ अधिराज भिक्षुस्वामी पधारो जी।
- तेरापंथ के नायक को सौ-सौ प्रणाम है,
- तेरापंथ जयकारी
- तेरापंथ दर्शन
- तेरापंथ प्रणेता
- तेरापंथ प्रबोध
- तेरापंथ मनहारो
- तेरापंथ रा नवमा
- तेरापंथ रा सरताज, युगां तक राज करो,
- तेरापंथ राणा, मूरत लागै प्यारी प्यारी रे,
- तेरापंथ शासन पावन है, भिखण की अमिट है,
- तेरापंथ शासन प्यारा है, यह धरती का उजियारा है,
- तेरापंथनायक तुलसी गुरुवर का गुरु उपकार है।
- तेरापंथऽऽऽऽऽ, अद्भुत है तंत्र अभिराम रे,
- तेरापथ दीपाने वाले
- तेरापथ रो राम
- तेरापन्थ सा शासन, कहीं जग में नहीं पाया,
- तेरी आरती उतारें,
- तेरी उमर बीती जाये,
- तेरी उमर बीती जाये, सुनले रे प्राणी,
- तेरी गठरी में लागै चोर, बटाऊ! क्यों सोया,
- तेरी जय-जय जय हो
- तेरी बीत रही जीवन-घड़ियां,
- तेरी मनमोहक मुद्रा जब
- तेरी राह पर चलता रहूं, मुझे नाथ! यह वरदान दो,
- तेरे गुण गाऊं, निशि दिन ध्याऊं,
- तेरे जैसा संत कहां
- तेरे द्वार पर खडा़ हूँ, करुणा नजर निहारो,
- तेरे भले-बुरे काम,
- तोड़ो घेरा
- तोल कर बोलो निरंतर, मधुर-सी वाणी।
- तोले मन को मन से
- त्रिभुवन तारणहार, त्रिभुवन तारणहार,
- त्रिशला के दुलारे तुम, मेरी श्रद्धा स्वीकार लो,
- त्रिशला दुलारा प्रभुवर
- त्रिशला रो जायोड़ो इण दुनिया में जादू करग्यो
- त्रिशलानंदन महावीर के
- त्रिशलानन्दन प्रभु महावीर, तुम हो जन-जन की तकदीर,
- थांरो जीवन है दिन च्यार रो रे,
- थारो मन सूं ही भरमायो,
- थारो सुधरैला जद व्यवहार, सारो संसार सुधर ज्यासी।
- थे ठायो अनशन, वाह! वाह! ओ काम कर्यो है सांतरो।