द से गीतिकाएँ
70 रचनाएँ
- दरश बिन व्याकुल हैं ये प्राण,
- दरस दिरावो हरख बधावो
- दरस दो भगवान्
- दरसण द्यो गुरुराज! आज मन प्राण बुलावै रे
- दर्शन पाए हैं
- दर्शन पाये
- दल दी बाड़ी
- दश प्रत्याख्यान
- दसवां आचारज म्हारै घणा मन भावणां,
- दसवां गणीवर ओपै।
- दादा-दादी सुणो सुगुरु री सीख,
- दिखा दो अब तो छवि नाथ! मुझे तुम,
- दिल का दुख
- दिल दुखाने से बड़ा जुल्म नहीं दुनिया में,
- दिल रो दर्पण यदि साफ नहीं,
- दिल साफ करो
- दिल से शासन में रमें गुरु का हमें वरदान है।
- दिवलै ज्यूं संसार म्हानै नश्वर लागे जी,
- दिवाना बना क्यों तूं धन में, विचार
- दिव्य ज्योति को नमस्कार
- दीन्हीं हीरकणी प्रभु संघ नै
- दीप जो तुमने जलाया
- दीप मैं कैसे जलाऊँ ?
- दीप! धुंआ क्यों उगलते?
- दीपा-नन्दन! ल्यो शत बन्दन, नाव करो भव-पार,
- दीपां के लाल दुलारे!
- दीपां रा दुलारा और प्यारा प्रभू आपां रा रे
- दीपांजी रा जाया! म्हारा रोम-रोम विकसावै,
- दीपांसुत भिक्षु का नाम ध्यायें सदा,
- दीपानंद भीखण जी पधारो
- दीपावली
- दीये से दीया जलता है
- दीवाळी आई रै, प्रभु वर्धमान गुण गावो।
- दुःख में तूं धीरज धर रे
- दुखी जग सारा, कर्म का मारा,
- दुनिया सारी देख तूं ये, धर्मशाला है।
- दुरंगी चाल
- दुर्लभ चिन्तामणि सम पायो प्राणी! ओ मानव-अवतार
- दुर्लभ मौका
- दुर्लभ सूर्य-युगल के दर्शन
- दृढ़ समकित धर थोड़ला
- देख आंसुड़ा री धार,
- देखकर जमाने रो रंग, जियो चकरावै है,
- देखकर जमाने रो रंग, जियो चकरावै है,
- देखता हालत दुनिया की तो मन सोचता है,
- देखो गण गुलशन महकाए।
- देखो जीभड़ली रो जबरो खेल तमाशो रे
- देखो मर्यादा की महिमा, कैसी गण की सुषमा छाई
- देग्या जन जन नै प्रतिबोध
- देरी ना करो, ना करो, ओ भगवान्,
- देव! चढ़ाएं श्रीचवणों में क्या ऐसा उपहार हो।
- देव! तुम्हारे श्रीचरणों में श्रद्धा का उपहार करें।
- देवकुमार जैसा दिव्य रूप तेरा
- देवते! बतलाओ
- देवां विदाई थाने छाती भर आवै,
- देवो देवोजी डगर
- देवों के देव गुरुवर! स्वीकारो तुम,
- दो अक्षर का नाम भिक्षु
- दो अब तो छवि नाथ! मुझे तुम,
- दो दिन का
- दो दिन का मेहमान
- दो नयन क्या फिरे
- दोनूं हाथ जोड़कर करूं
- दोष महा विकराल
- दोहा : पल भर री नहीं है खबर, कद रुक ज्यावै ओ सांस,
- दौड़ रहा है आज आदमी
- दौड़ा-दौड़ लगा रहा,
- द्वन्द्व मिटाऊं मैं
- द्वारे तुम्हारे प्रभु ! कब से मैं खडा़,
- द्वैत-अद्वैत