व से गीतिकाएँ
69 रचनाएँ
- वंदन श्रुत-सम्राट
- वंदन स्वीकारो म्हारा
- वंदना करने यहां
- वंदना महावीर लो अभिवंदना
- वंदना है सघ को, संघ की उमंग को-2
- वंदे जिनेन्द्रम्
- वदना मां का नन्दन दुलारा, तुलसी न सभी को बड़ा प्यारा-२,
- वदनानन्दन गुरु तुलसी को वन्दन शत-शत बार,
- वदनासुत तुलसी का हम गौरव गाते हैं,
- वन्दन
- वन्दन वन्दन तुमको बालू नन्दन
- वन्दन हो अभिनन्दन हो, ये तन-मन चरण चढ़ाएं हम
- वन्दना महावीर सौ सौ वन्दना
- वन्दना लो झेलो
- वन्दना लो झेलो, भक्तां री भगवान!
- वरदान जिन्दगी है, ये संत बताएं,
- वर्षा
- वर्षी तप करकै, श्रावकजी नव इतिहास बणायो,
- वर्षी तप री महिमा
- वाणी संयम दिवस
- वारी जाऊं चरणां में,
- वारी भिक्षू स्वाम की, धारी शिर जिन-आण अखंड क।
- वार्षिक मर्यादोत्सव आया।
- विघ्न विनायक मंगलदायक स्वामीजी रो नाम
- विघ्न हरण – अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो
- विचार किया क्या?
- विजय गीत
- विजय ध्वज फहराए, भिक्षु चेतना वर्ष,
- विजय-विजया
- विदा समय की शिक्षा
- विदाई
- विदाई गीत
- विद्या का वरदान है, यह जीवन विज्ञान है,
- विध्न विनायक मंगलदायक, शासननायक शान्ति विधायक,
- विनत हो हम करते शासन का सम्मान।।
- विनय
- विमल—विवेक
- विरल व्यक्तित्व
- विवेक का मोती
- विश्राम लो, मत विश्राम लो
- विश्व के आलोक लो अभिवन्दना,
- विश्व को नव आलोक मिले
- विश्व क्षितिज का
- विश्व शांति के अग्रदूत हे श्वेत संघ सेनानी!
- विश्व-मंच पर नई क्रान्ति की
- विश्वमैत्री की दिशा में हम कदम आगे बढ़ाएं।
- विश्वास दीप
- विष को हँस-हँस पीते जाओ
- विषयों की ज्वाला
- वीतराग ! भव पार करो
- वीर की पावन जयन्ती को मनाये हम
- वीर के अनुगामी भिक्षु-स्वामी के गुण गाएंगे,
- वीर प्रभु! सुणो नी पुकार,
- वीर भिक्षु अभिवंदन शत-शत
- वीर भिक्षु के चरण
- वीर मेरी चादर मैली
- वीर सुणो मोरी वीनती
- वीर हो महावीर हो तुम करूं शत-शत वन्दना,
- वीर! तेरी वाणी को हम सुमरें,
- वीर! तेरी वाणी को, घर-घर पहुंचायेंगे,
- वीरजी म्हारे घर पे पार्या रे,
- वृक्ष तणो ज्यूं पाको पानड़ों रे
- वृक्ष धरा के हैं आभूषण।
- वे कितने हैं?
- वेगा पधारो गुरुराज! पलकां स्यूं पंथ म्हैं बुहारां।
- वैराग्य से कल्याण
- वो सबको प्यारा है, त्रिभुवन तारा है,
- व्यसनों से जीवन होता बरबाद
- व्रत से उत्तम बनता जीवन।