क से गीतिकाएँ
131 रचनाएँ
- कंटालिय जन्मोत्सव साझ, सुधरी में की सिंहोगाज,
- कच्चे रिश्ते कच्चे नाते
- कड़वो बोल्यां अनरथ हुवै
- कद आ नाव तिरावोला
- कद बो शुभ दिन आसी रे, बणस्यूं शिवपदवासी रे,
- कन्याओं की शक्ति
- कब तक पगले टिक पायेगा है तुम्हारा तास का,
- कब से खड़ा द्वारे, प्रभो! दर्शन दिला दो,
- कभी था उपवन में मधुमास
- कभी था सुन्दर यही शरीर
- कभी सिर पर थे काले केश
- कर दिया सब कुछ समर्पण
- कर न सको यदि
- कर ले ज्ञान अरे इंसान
- कर ले निज पहचान, द्वार तेरा खुल जाएगा।
- कर ले, हां, कर ले कुछ काम तू भलाई का,
- कर लो-कर लो छात्रों अपने जीवन का उत्थान रे
- कर संथारो स्वीकार भारी भार उठायो है।
- कर सत्कर्म सदा जीवन में तजकर फल की आशा,
- कर सहयोग भूल जाओ तुम है।
- करते गुरुवर को हम वन्दन
- करते तुम्हें शत-शत प्रणाम
- करते महावीर को वन्दन
- करते हैं तुमको नमन
- करनी से पहचान
- करमां री कहानी
- करुणा सागर वीर प्रभु को वन्दन शत्-शत् बार करें
- करूणा की धारा
- करूणा सागर महावीर
- करें उपशम की साधना,
- करें जय गणिवर को वन्दन
- करें हम अंतर अनुसंधान।
- करें हम अभिनन्दन
- करें हम आध्यात्मिक उत्थान।
- करें हम मंगल अभ्युत्थान।
- करें हम महाप्रज्ञ का ध्यान
- करें हम वंदन बारम्बार।
- करें हम संस्कृति का सद्ज्ञान,
- करो तपस्या जग जाये जीवन ज्योति
- करो तपस्या मिटे समस्या सुनलो रे
- करो भरोसा गुरु बचनों पर।
- करो विसर्जन, करो विसर्जन, करो विसर्जन रे,
- कर्मफल
- कर्मा स्यूं ए ढकी आतमा दूर हटा ओ घूंघटियो,
- कर्मों का नर है मारा, इनके आगे जग है हारा,
- कर्मों की मार
- कल की आशा में साथी! खोता क्यों आज है,
- कलियुग
- कलियुग में भी सतयुग जैसा जीवन सुखी बनाएं,
- कल्पतरू रा बीज फल्या
- कवि, यह कलम पुरानी है
- कविते, क्या तू कुंठित है ?
- कव्वाली
- कषाय
- कहां रूक जाए रे पता क्या बयार का?
- कहीं रुदन है कहीं गीत है।
- कहे चाहे कुछ भी जमाना यह सारा,
- कहै किसनोजी चाल-चाल
- काँटों में फूलों में सम रहना जीवन है,
- कांटों से भरा पथ यह हमारा है,
- काई करे रै गुमान
- काटों के संग में सदा, फूलों का उपहार मिला,
- काया का स्वरूप
- काया काची रे
- काया की माया, दो दिन में बन जायेगी माटी,
- काया मिट्टी की
- काया री बाड़ी निरखी नै हरी रे
- काया है, झूठी माया है,
- कारखाने से शो-रूम
- काल की विचित्र गति
- कालू कालू बोलूं
- कालू गण-सिणगार,
- कालू गणेश्वर आपरो – अहो प्रभु! ध्यान धरूं नित आपरो
- कालू ने भजो
- कालू स्तुति
- कालू-कालू रे
- कालूगुरु रै चरणां में सी बार, म्हारी वंदना,
- कालूप्रभु-पादाम्बुज अर्पित भावभीनी वंदना।
- काले बादल नभ में आते।
- कितना सुखद सुनहरा बचपन।
- कियां चुकावा गुरु रो ऋण
- किरपण दीन अनाथ ए
- किस नशे में मानव! है तू सो रहा,
- कुछ भी नहीं असंभव साथी
- कुछ व्यक्ति छोड़ जाते हैं ।
- कुछ सोच अरे
- कुछ सोच, अरे राही !
- कुटिल, काला नाग
- कुल नै उजाल्यो म्हांरो लालजी।
- केसा उपचार
- कैसी वह कोमल काया रे
- कैसी है पहचान तुम्हारी
- कैसी है यह दुनिया मैं तो समझ नहीं पाया,
- कैसे आएंगे भगवान ?
- कैसे आत्मा में साधना का रंग आए?
- कैसे उसे भुलाएं?
- कैसे दूं उसका परिचय?
- कैसे ध्यान लगाओगे
- कैसे बतादो भगवन्! तेरी आरती सजाऊं,
- कैसे भजूं
- कैसे भुलायें
- कैसे मैं तुम्हें मनाऊं
- कोई न किसी का साथी है
- कोई न पूछे निर्धन को
- कोई बैठा प्यासा
- कोई सुखी है
- कोई से हो जाए खटपट।
- कोटि-कोटि कण्ठों से गाएं जिनके गीत सुरुम्य रे।
- कोहिनूर गण नै सुंप्या, गुरुवर तुलसी हो।
- कौआ काला कोयल काली।
- कौन अभागा
- क्या जाने जीवन
- क्या बनना है बोलो पढ़कर
- क्या भरोसा इस पवन का?
- क्या भूलें ? क्या याद करें ?
- क्या मंद भाग्य का रोना है
- क्यांरो करै रे गर्व बावला,
- क्यूं भरमावे रे मनुज! तूं,
- क्यों
- क्यों करते केवल पर दर्शन
- क्यों भूल रहा पगले! एक दिन तो जाना है।
- क्रूर काल
- क्रोध
- क्रोध कदेय नहिं कीजिए
- क्षण भंगुर दुनिया
- क्षमा करो मन खतं स्यूं
- क्षमा का पर्व
- क्षमा का पर्व
- क्षमा दिवस
- क्षमा-धर्म की विजय-पताका,
- क्षमायाचना दिवस