ओ-औ से गीतिकाएँ
48 रचनाएँ
- ओ इन्सान! ओ इन्सान!
- ओ उजियारो च्यार दिना रो फेर अंधेरो हो ज्यासी,
- ओ खिण ओ खिण बीती जावै, भोला भाइड़ा।
- ओ गण के सितारे
- ओ गुरुवर !वन्दन लो शत वार,
- ओ गुरूवर आपरो उपकार
- ओ जरा कर ले प्रभु से तूं प्यार,
- ओ जिनशासन दीप, भवोदधि द्वीप, भक्तियुत नमन करां,
- ओ तपस्या रो रंग
- ओ तो लाडांजी रो वीरो, माता वदना रो लाल,
- ओ दीपां नंदन
- ओ धर्म सढा मंगलकारी
- ओ नरभव पायो अनमोल, इण नै कोड्यां स्यूं मत तोल
- ओ प्रभुवर! भीति भगा दो,
- ओ भव रत्न चिंतामणि सरिखो
- ओ भाग दौड़ में ही नर जीवन व्यर्थ गमावै रे,
- ओ भिक्षुरज! शत-शत प्रणाम
- ओ भिक्षुराज! अनुशासन की इस युग को देन तुम्हारी है,
- ओ भैक्षव गण अधिनायक
- ओ मन के पंछी रे,
- ओ मन हंसा बावला मत इत उत भटका खा,
- ओ मनड़ो सरसै जी...
- ओ महावीर! ओ महावीर! दिखलादो भवसागर तीर
- ओ मेरे गुरुदेव !
- ओ मेरे तुलसी स्वाम
- ओ म्हारा गुरुदेव!
- ओ म्हारै खुशियां रो नहीं पार, युवाचार्य पाया।
- ओ रे खेवैया! पार लगा दे तूं नैया,
- ओ लगी पांख सी संत-सत्यांरै दोड्या आवैरे,
- ओ लागै आलीशान
- ओ लागै प्राणां स्यूं भी प्यारो, जन-जन री आख्यां रो तारो,
- ओ विराट व्यक्तित्व!
- ओ वीर प्रवर
- ओ संघ के सितारे, दीपां के लाल प्यारे,
- ओ सांवरा, ओ सांवरा,
- ओ सांवरिया स्वाम
- ओ सिरियारी के संत!
- ओ स्वामीजी रो नाम सदा म्हारै मन भायो है,
- ओ! दूर के मुसाफिर! मंजिल न भूल जाना रे,
- ओ! श्वेत संघ के सबल सैनिको! अपना फर्ज बजाना है।
- ओच्छव आयो रै!
- ओछी तो ऊमर जिण में
- ओम् अर्हं, ओम् अर्हं, जपो प्यारे ओम् अर्हं,
- ओम् ओम् ओम् भिक्षु की जय बोलो,
- ओम् भिक्षु जय तुलसी मंत्र सदा बोलो,
- ओम् भिक्षु जय भिक्षु, श्वास श्वास गाता है।
- औरों का जो करता आदर,
- औरों की चिन्ता को छोड़ के दे तूं निज पर ध्यान,