च-छ से गीतिकाएँ
54 रचनाएँ
- चंचल मन को सुस्थिर कर दे,
- चंदेरी रो संत
- चढ़ते परिणमां स्यूं अंतिम, स्वीकारो थे संथारो।
- चत्तारि मंगल
- चन्दना का पारणा
- चन्दना री पुकार
- चन्दना-महावीर रो प्रसंग
- चन्देरी रो हीरो
- चम चम चमकै
- चमके दुनिया में देखो बालुजी रो लाडलो
- चमचागिरी कभी मत करना।
- चयन दिन आया मनभावन।
- चयन दिवस आयो आंगणे, चांरू कूंटा गूंजे जय जयकार।
- चयन दिवस आयो मोहनो...
- चरण चलते हैं चलेंगे
- चरणों में प्रभुवर
- चरमोसव: आज मनाओ,
- चल पड़े जो चरण
- चलाचल
- चांद करो मत अहम
- चातुर्मासिक साधना
- चार तीरथ के तुम रखवारे
- चार दिनों की माया क्यों तुम झगड़ रहे,
- चार शरण
- चार शरण स्वीकार करलो संकट टल जाये,
- चाल रे बटाऊ! पंथ कट ज्यावैला,
- चिड़िया उड़ती फरर फरर।
- चित्त में बसिया रे
- चित्त में बसिया रे श्री तुलसी गुरुराज।
- चित्त समाधि गीत
- चिह्नों का प्रभाव
- चुनौती
- चूं चूं चूं चूं चिड़ियां करती।
- चेत चतुर नर
- चेतन ले लै शरणां
- चेतन! चिदानन्द
- चेतना की खोज में हम रह रहे हरदम
- चेतना-उद्धार
- चेतानन्द प्रभु नै भजो
- चेत्—चेतन
- चैत्य पुरुष जग जाए
- चौदह स्थानक रा जीव ए
- चौबीसी
- चौबीसी रो गीत
- चौमासी चवदश आई है, आ नई प्रेरणा ल्याई है,
- चौरासी की फेरी
- चौरासी में चाक ज्यूं रे
- च्यानणीयों रहतां-रहतां मोतीड़ा पोयले
- च्यार दिनां री च्यांदणी, होसी आगै काली रात,
- छन्द-भटक भटक मन मृग जग वन में,
- छाया कैसा नशा कैसा नशा! समझन आये
- छोटी इकाई का अस्तित्व
- छोड़ जगत की चिन्ता, खुद को जान लें,
- छोड़ो क्यूं कोनी