घ से गीतिकाएँ
13 रचनाएँ
- घट-घट में चनणो
- घट-दीप जलाओ
- घड़ियां मिलन की सुहानी हैं, म्हानैं मिल्या अै पल वरदानी है।
- घड़ी भर प्रभु रो नाम सुमरले,
- घणां सुहावो माता
- घणी खम्मा गुरुवर नै, रूं रूं में छाई खुशहाली,
- घणै काळ स्यूं सोया,
- घर की फूट बुरी है भाई।
- घर घर उड़ै रै
- घर रा गोरख धन्धा छोड़ इक दिन जाणो पड़सी
- घर्म अनमोल
- घुंघरू छम छमा छम छण णण णण णण बाजै रे
- घोर तपसी हो मुनि!