उ-ऊ से गीतिकाएँ
47 रचनाएँ
- उजला प्रभाल आया, है अंगना हमारे।
- उजले पल उजली दिशाएं हैं, दर्शन पा हम हरषाए हैं।
- उज्ज्वल शासना तेरी
- उठ जाग थारो जीवन सूं ही बीत्यां जा रयो,
- उठने वाला डेरा
- उठो जवानो
- उड़ रहा पाखी गगन में
- उडा़न —
- उड़ान —
- उड़ान कालजयी व्यक्तित्व नै वंदन शत शत वार
- उड़ान-आंखों में बसी है मूरत, प्रभुवर की मनहारी,
- उड़ान-ओ तन माटी रो दियो, जलै ज्ञान री ज्योत,
- उड़ान-ओ वसुधा के उजियारे, जिन शासन गगन सितारे,
- उड़ान-गुरु नाम, सुख धाम,
- उड़ान-गूंज रह्यो दिग् दिगन्त में, तुलसी रो जय नाद,
- उड़ान-गूंजे जय नारों से गगन धरा रे,
- उड़ान-घर पे तुम्हारे चाहे धन की हो भरमार।
- उड़ान-छाया है अज्ञान कुहासा, खोया निज आकार,
- उड़ान-जीवन है दिन च्यार रो, कुछ तो करो विचार,
- उड़ान-नाम है प्यारा, जग उजियारा, अन्तर्तिमिर मिटाए रे,
- उड़ान-पाया तूं ने s s तम में उजाला।।
- उड़ान-प्रभु भगति में है रंग्या, रोम-रोम अरु प्राण।
- उड़ान-फैले सकल जहान में मैत्री की भावना,
- उड़ान-वीर नाम है मुझको प्यारा, नित उठकर मैं ध्यान धरूं।
- उड़ान-संघ अपना प्राण है, संघ है अपनी शरण,
- उड़ान-हर्ष घन उमड़ रहा, भक्ति जल उछल रहा,
- उड़ान-हे देव! तुम इस भक्त की सुन लो अरदास को,
- उडा़न—
- उड़ान—
- उड़ान—
- उड़ान—
- उड़ान—ॐ भिक्षु जपें, जय भिक्षु जपें,
- उतरो चिन्मय चरण, ले लो अपनी शरण,
- उत्तम श्रावक
- उत्सव आया है।
- उन्नति का सूत्र सुझा गये
- उपकार
- उमडै जनता रौ सैलाब, दिन-दिन बढ़े संघ री आब,
- उमरियां बीती जावै रे,
- उमरियां सारी रे सारी,
- उम्र
- ऊँ जय दीपांनन्दन
- ऊँ भिक्षु-जय भिक्षु रटन लागावां
- ऊंचा उठाओ तुम, हो अपने भाव को,
- ऊगा स्वर्णिम दिन आज, हम मंगल गाएं ।
- ऊग्यो भानूड़ो, सोने-चांदी रो बालू आंगणै।
- ऊग्यो स्वर्णिम भान है, दर्शन पा पुलकित प्राण है।