आ से गीतिकाएँ
106 रचनाएँ
- *आओ, हम संकल्प करें जीवन को उच्च बनायेंगे,
- आ गई यह विदा की घड़ी, सबके दिल में उदासी है छायी,
- आ तो च्यार दिनां री च्यांदणी,
- आंकणो है संयम रो मोल
- आंख खोल करके,
- आँखों के सितारे मेरे सांवरिया,
- आंखों से कर परगुण दर्शन।
- आंख्यां रो तारो म्हारो लागै सगलां नै प्यारो
- आंगन में पावन तुलसी ज्यों
- आंधी और तूफानां में, रुक्या न जो व्यवधानां में,
- आंधी और तूफानां में, रुक्या न जो व्यवधानां में,
- आंधी क्यों तूं धूम मचाती?
- आंसू में क्या छिपी
- आई बहारें, आंगण हमारे, संघ सितारे, गुरुवर पधारे।
- आई माघ में दीवाली, घी के दीप जलाएंगे।
- आई रवि में नव अरुणाई, चेहरे चेहरे पर तरुणाई,
- आऊखे री घड़ियां थांरी घटती ही ज्यावै हो
- आएं चाहे सौ-सौ संकट
- आओ आओ ओ गुरुराज! तुम्हें ये प्राण बुलाते हैं।
- आओ आओ दिखाओ मूरतिया,
- आओ ए! सहेल्यां संग, गावां आज दीहाड़ो।
- आओ दीवाळी रा घट-घट दीप जळावां जी, जळावां जी।
- आओ नी सांवरिया जोवां बाट म्हैंऽऽऽऽ
- आओ प्रभुवर पारस
- आओ भगवन मेरे आंगन मेरी इच्छा साकार करो
- आओ युवकों आगे, कुछ कर दिखलानां है,
- आओ रे, मेरे प्रभु आओ रे,
- आओ स्वामीजी
- आओ स्वामीजी, थांनै झाला दे बुलावां
- आओ स्वामीजी!
- आओ हम एक साथ
- आओ हम सब आज करें तुलसी को वन्दन रे
- आओ-आओ भिक्षु स्वामी!
- आओ—आओ भिक्षु स्वामी !
- आओ, आओ धरती पर प्रभु आओ महावीर।
- आखा तीज
- आखिर तो जाणो पड़सी – मत कर रे तूं मोह जगत स्यूं
- आख्यां खोलो
- आचार्य कालूगणी आरती – ॐ जय कालू गुरुदेव, धन्य जमारो बांरो
- आचार्य तुलसी
- आचार्य महाश्रमण : एक परिचय
- आचार्य स्तुति
- आचार्यश्री कालूगणी
- आचार्यश्री जीतमलजी (जयाचार्य)
- आचार्यश्री डालचन्दजी
- आचार्यश्री भारीमलजी
- आचार्यश्री भिक्षु
- आचार्यश्री भिक्षु के प्रति
- आचार्यश्री मघवागणी
- आचार्यश्री महाप्रज्ञजी
- आचार्यश्री महाश्रमणजी
- आचार्यश्री माणकलालजी
- आचार्यश्री रायचन्दजी
- आज उषा ल्याई नूंई लाली,
- आज और कल
- आज क्या हो गया ?
- आज जरूरत उस योवन की
- आज धरा नभ हरषे घर गंगा आई
- आज मंगल मंगल है
- आज म्हारै स्वामीजी रो, वर्षी रो दिन आयो रे,
- आजादी का पर्व:
- आणंद रा ब्हाला
- आतमा री जोत जगाई स्वामी भीखणजी,
- आत्म पहचान
- आत्म बल को जगायें हम
- आत्म-शुद्धि रो
- आत्मशुद्धि का खुलता जिससे द्वार है।
- आत्मा का ध्यान
- आत्मा का राम
- आत्मिक आनंद
- आत्मोदय
- आदमी होकर पशुओं सा मत करना व्यवहार,
- आदिनाथ अजित संभव
- आदिनाथ स्तुति
- आदिम बाबै री
- आदीश्वर करसी पारणो
- आनन्द में, परमानन्द में,
- आप रै जीवन रो कर ले जरा विचार,
- आप हो शासन रा सिणगार,
- आपणै तो देव गुरु धर्म
- आपणै भागां री
- आपां गण रो गौरव गावां, गणवेदी पर प्राण चढावां
- आपां भीखण जी स्वामी री नित, बलिहारी जावांला
- आपो जद पूरो मार लियो,
- आयंबिल का प्रभाव
- आया वह शुभ दिन जब दायित्व दिया था।
- आया शरण में नाथ! तुम्हारी,
- आयुष टूटी को सांधो को नहीं रे
- आये हैं भक्त
- आयो आंगणिए त्यौंहार, लागी रंगरलियां,
- आयो चोमासो सुखकार, भविक मन भावणो जी।
- आयो नयो प्रभात
- आयो मंगलमय त्योहार
- आयो महावीर रो हेलो।
- आरती उतारां
- आरती उतारां म्हैं तो त्रिशला रै लाल री
- आरती उतारूं बाबै मिखणजी री भाव स्यूं,
- आरती तेरी गाऊं सुबह शाम मैं,
- आर्य भिक्षु जनमे जिस युग में, खुले नए आयाम रे,
- आवो सब रै सागै मैत्री आपां करल्यां जी, करल्यां जी,
- आशा का गगन, सपनों का चमन,
- आशीर्वाद तुम्हारा
- आसमां रा चांद तारा
- आस्था दो हे स्वाम! संघ तरुवर सरसाओ है।
- आस्था रा अनुपम दीप जल्य़ा
- आस्था रा अनुपम दीप जळ्या,