ज-झ से गीतिकाएँ
221 रचनाएँ
- (जयाचार्य के प्रति)
- *झरना बहता पल—पल, करता है ध्वनि कलकल,
- जंग यह जीवन का ले
- जंबू
- जग का प्यार देख मत भूल,
- जग के स्वार्थ मरे नाते, संत जन सबको समझाते,
- जग केवल सपना
- जग को जीतो मधुर प्यार से
- जग में दीन जले धनवानों से, धन वाले नेता से,
- जग यह मुसाफिरखाना है, चालू आना जाना है,
- जग सारा, मतलब का, झूठा सारा व्यवहार है, मतलबी यार है।।
- जग है मकड़ी का जाल
- जगत का कोई आकर्षण, मुझे भटका न पाएगा,
- जगत में मानव धर्म महान
- जगत सपनै री माया रे बादळिये-री-सी छाया रे
- जगमग तेरापंथ
- जगाओ युवकों अब नव जोश
- जन जन पुकारे भिक्षु हमारे महा उपकारी
- जन मन मंगलकारी, नेमिनाथ नमो,
- जन-जन के भगवान तुम्हीं हो महाश्रमण
- जन-जन में जागे विश्वास, संयम से व्यक्तित्व विकास,
- जन्म जयन्ति
- जन्मदिन मुबारक
- जन्मधरा निज लाडेसर रो, उत्सव आज मनावै है।
- जन्मभूमी केलवा में संघ-जन्मोत्सव मनाएं।
- जन्मोत्सव
- जप दिवस
- जप-तप रो रंग लगाओ
- जपलो भिक्षु नाम
- जपूं मैं प्रभु तुलसी का नाम
- जपें हम तुलसी तुलसी नाम
- जपो नवकार मंत्र ज्ञाता
- जब तक छूटे न माया जाल,
- जब तुम धरती पर आए थे
- जब तुम धरती पर आए थे—२
- जब पुण्य तिथि आती
- जब यह मन निराश होता है
- जबर झंड चंदेरी गढ़ में चरमोच्छव-छाया।
- जबरी ज्योति जलाई
- जय गणाधिपति गुरुदेव,
- जय जय बोलो बालूजी रे लाल री
- जय जय शासन
- जय जय श्री तुलसी गुरुवर!
- जय जयाचार्य श्री गणिवर की
- जय जीवनदाता गुरुवर!
- जय ज्योतिर्धर! धर्मक्रान्ति कर गहरा दर्शन पाया,
- जय ज्योतिर्मम चिन्मय दीप जले।
- जय तेरापंथ प्रणेता की,
- जय तेरापथ नवमें नायक
- जय त्रिशला-सुत वीर महान्,
- जय बोलें सम्वत्सर पर्व मनाएं जय बोलें,
- जय बोलो आदिम जिनवर की, मरुदेवा सुत तीर्थंकर की।
- जय बोलो तुलसी गणिवर की
- जय बोलो मघवा
- जय बोलो वीर जिनेश्वर की।
- जय बोलो संघ
- जय बोलो, जय बोलो, धर्म—संघ की जय बोलो,
- जय बोलो! तुलसी गुरुवर की
- जय भिक्षु-भिक्षु सब गाएं।
- जय महातपस्वी महाश्रमण जय वीतराग अवतारी
- जय महाप्रज्ञ की जय हो
- जय महाप्रज्ञ गुरुदेव
- जय महाप्रज्ञ गुरुराज,
- जय महावीर की बोलो,
- जय महावीर भगवान
- जय महाश्रमण गुरुवर
- जय महाश्रमण मंगलदायी
- जय मारवाड़ के स्वाभिमान
- जय युगद्रष्टा! जय युणस्रष्टा!
- जय रा आभारी
- जय वीर प्रभु
- जय हे जय तुलसी, तुलसी जपां दिन-रात।
- जय हो कल्लू-सुत
- जय हो, सदा विजय हो,
- जय-गान
- जय-जय ज्योतिचरण, जय-जय महाश्रमण
- जय-जय स्वामी हो भिक्षू_गुण-मणि-दरिया।
- जय-जय हे मर्यादाकार! खोजा आस्था का आधार,
- जयकारी रे! वीर! तुम्हारा प्यारा नामरे,
- जयवंतो शासण रेऽऽ, भैक्षव आसन रेऽऽ
- जयाचार्य की कीर्तिगाथा
- जयाचार्य के प्रति
- जरा सोच ले तूं मन में स्याणा,
- जर्दे से दूर रहना
- जलता रहा तम में भी जो बनकर सदा मशाल,
- जहाँ हर डाल—डाल पर खिलते तप के फूल,
- जाग अरे तू बीती जाये रे उमरिया,
- जाग उठो युवकों अब अपना सोया शौर्य जगाना है
- जाग उठो, ओ युवा बन्धुओं ! कुछ करके दिखलाना है,
- जाग जा मौत रो
- जाग रहा आनन्द
- जाग रे जाग अरे इंसान! सूर्य उदियाया है,
- जाग रे मुसाफिर तूं नींद में क्यों सोया है,
- जागरण जैन का जग में, भिक्षु की विजय हो जय हो।
- जागृत धर्म हमारा, जीवित धम हमारा,
- जागृत युवा समाज चाहिए
- जागृत संत
- जागृत होने का क्षण
- जागो ए, जागो ए, जागो ए, जागो ए, सोने वालों,
- जागो जागो अब जागणै री वेळा आई है।
- जागो जीवन अति चंचल है,
- जागो भाई भोर हुई,
- जागो रे भाई जागो, हुई है अब भोर,
- जागो हे! जागो! जागो हे! जागो हे!
- जागो! जागो रे, जीवन यों ही बीत न जाए,
- जागोजी, जागोजी, शुभ अवसर आया है जागो,
- जाना सभी को है निश्चित यहां से,
- जानो मात-पिता उपकार
- जाप बड़ा हितकारी
- जावां बलिहारी,
- जिंदगी में सफल होना, नहीं अवसर हाथ से खोना।। ध्रु.।।
- जिज्ञासा, प्रज्ञा और आस्था
- जिन भाख्या पाप अठार
- जिन शासन तेज बढ़ाया रे
- जिनकल्पी कष्ट उदीरी नैं लेवै
- जिनकल्पी कष्ट उदीरी नैं लेवै
- जिनवर का नाम ले, प्रभुवर का नाम ले,
- जिनवाणी को जीवन में उतारा नहीं,
- जिन्दगी उपचार बनकर रह गई,
- जिन्दगी में फूल बनकर मुस्कराना चाहिए,
- जिन्दगी यह मिली है सुनहरी, कोडियों में न इसको तूं खोना,
- जिन्दगी सफर तेरी, कहीं न ठिकाना है,
- जिन्दगी सुफल बनाएं हम।
- जिन्दगी है सफर मुस्कुराते चलो,
- जिम द्रुम पत्रज पांडुरो
- जिस मानव के मानस में बहती करुणा की रसधार नहीं,
- जिसका जीवन सद्गुण का भण्डार है।
- जिसकी आज जरूरत उसने
- जिसको अपनी है पहचान,
- जीणो थोड़ी सो बावला, जीणो थोड़ो सो ।।
- जीना भी है एक कला
- जीना है दिन चार
- जीवड़ला आंख उघाड़लै जागण री बेला आई,
- जीवड़ला करलै च्यांदणो ले अरे धर्म री ओट,
- जीवन
- जीवन अनमोल
- जीवन अमोल है,
- जीवन ओ दो दिन रो, पाणी ज्यूं बह ज्यासी।
- जीवन कहानी
- जीवन की इस धरती को तुम सत्य-वृत्ति से सींचो,
- जीवन की कला
- जीवन की ज्योति जला,
- जीवन की परिभाषा
- जीवन की यदि शान बढ़ाना।
- जीवन के राही! रे
- जीवन को पावन बनाते चलो,
- जीवन जीना कब आयेगा
- जीवन तुम्हारा एक वरदान है,
- जीवन तुम्हारा पल-पल यह बीत जायेगा ।
- जीवन नै पावन करणै रो, ओ मारग धर्म बतावै है
- जीवन पाणी रै प्रवाह ज्यूं वह ज्यावै रै चेतनिया,
- जीवन पावन करण, सच्ची तेरी शरण, त्रिशलाप्यारे,
- जीवन बहता पानी
- जीवन बीतै पल-पल, ओ र है सरिता रो जल,
- जीवन बीत्यो जावै, कर ले धर्म कमाई।
- जीवन मंगलमय हो।
- जीवन में तुम भला करो, कभी न किसी को छला करो,
- जीवन में तुम में तुम करो भलाई।
- जीवन में व्रत जो अपनाये, श्रावक हो तो ऐसा हो,
- जीवन यात्रा
- जीवन रीत लिये आया हूं
- जीवन रो आर है न पार मौत तो है पल भर की,
- जीवन रो फूल खिलाल्यो थे
- जीवन रो व्यवहार सुधारै,
- जीवन रो, कांई है भरोसो भाई जीवन रो?
- जीवन लाखीणो,
- जीवन विज्ञान
- जीवन सरस बनाना
- जीवन हर पल घटतो ही जावै रे,
- जीवन है जाबक छोटो,
- जीवन है वरदान सरीखो, तूं मस्ती स्यूं जी लै रै।
- जीवन-पथ का पाथेय बने,
- जीवन-विज्ञान गीत
- जीवनको सरसायें,
- जीवा! तू तो भोलो रे
- जुए की लत मत अपनाना।
- जुड़ा तुमसे सांसो का तार
- जुदाई र साथ में हैं जुड़े,
- जैन जगत् के तीर्थंकर
- जैन धर्म महान
- जैन धर्म हमको
- जैन विद्या का प्रशिक्षण सबको लेना है,
- जैन संत
- जैन संस्कार
- जैन सही में वे कहलाते, जिनवाणी जो अपनाते,
- जैनमत मर्यादा स्मृति हेतु, महोत्सव छाया है,
- जैसा भीतर, वैसा बाहर।
- जो अन्तर में ही रमण करे, बह सन्त पुरुष कहलाता है।
- जो कर्म किया वो भुगतना पड़ेगा।
- जो जागेगा वही पायेगा
- जो नवयुग का निर्माण करे, युगपुरुष उसी को कहते हैं।
- जो पल जावे
- जो मन खोजा आपना
- जो होनी वह होगी, क्यों तू रोये,
- ज्ञान बिन भव सिंधु
- ज्ञान रो उजालो घट में करलै क्यूं नी रे,
- ज्ञान से प्रकाश
- ज्ञानशाला प्यारी, बच्चों की फुलवारी,
- ज्ञानामृत का प्याला
- ज्ञाशाला का यह उपहार, घर-घर जागे सत्संस्कार,
- ज्यांरी मूरत है मनहारी, जन-जन जावै बलिहारी,
- ज्यादा सुनो और कम बोलो।
- ज्योति का अवतार बाबा
- ज्योति के सागर! तिमिर अज्ञान का हरदो,
- ज्योति जला
- ज्योति पुंज महावीर
- ज्योति बन कर सदा जलना,
- ज्योति बनके जलें
- ज्योति-पर्व पर श्रद्धा-अर्पण
- ज्योतिचरण जय हो
- ज्योतिपुरुष की जय-जयकार
- ज्योतिर्धाम, तुम्हें प्रणाम
- ज्योतिर्मय से
- झरने की ज्यों बढ़ते जाना।
- झुकना सदा न श्रेयस्कर
- झूठ
- झूठ कभी मत बोलो, बच्चों!।
- झूठा नाता
- झूठो जग रो नातो,
- झूम-झूम गुण गाऊं रे
- झोली भर लाती