प-फ से गीतिकाएँ
138 रचनाएँ
- पंखीड़ा ओ पंखीड़ा
- पग-पग मंगलाचार
- पट्टोत्सव
- पतझड़ के सूखे कानन में
- पथ का गीत
- पथदर्शक गुरुराज तुलसी प्रभुवर प्याराजी।
- पदचिह्न
- पद्मावती आराधना
- पधारे धरती पर भगवान
- पधारो श्री तुलसी गुरुराज।
- पधार्या स्वर्गां में
- पर उपकार भूल मत जाना।
- पर भावों की ममता, अब छोड़ अरे चेतन
- पर भावों की ममता, अब छोड़ अरे चेतन,
- पर सुख देख न जलना भाई।
- पर हित क्या करते हो बोलो।
- परम को प्रणाम
- परम पूज्य गुरु महाश्रमण को जग यह शीश झुकाता है,
- परम से प्रीत तूं कर ले, मुक्ति का द्वार खुल जाये,
- परमेष्ठी पंचक ध्याऊं मैं सुमर सुमर सुख पाऊं
- परमेष्ठी वंदना
- परमेष्ठी स्तुति
- परमेष्ठी स्तुति
- परिवर्तन का खेल
- पर्दे पीछे छलना
- पर्यावरण प्रदूषण से जग को बचायें हम,
- पर्युषण पर्व
- पर्युषण मनावां
- पर्व पजूषण
- पर्व पजूषण
- पर्व पजूसण आयो,
- पल पल जपूं सांवरे
- पल पल बीती जाय
- पल पल सफल बणालै तूं भाई
- पल पल सफल बणालै तूं, भाई
- पल-पल लाभ उठाओ
- पल-पल है सामने – कहता है कौन यहां तुलसी नहीं है
- पलक पलक तोरी बीतै उमरिया,
- पहरुओं से
- पहली तोलो रे
- पहले अपना घर संभालो
- पा ली-पाली की पावन धरा,
- पांचू परमेष्ठी प्यारा
- पाछा भेजोनी
- पाट सके हम कैसे अन्तर
- पादप! धैर्य तुम्हारा
- पानी बहता ही निर्मल है
- पापमती ठाकुर
- पापी मानस काला काला
- पायो अवसर म्हैं पावन।
- पार हो जाएगा रे, कर आत्म-धर्म से प्रीत,
- पारस पारस री लगाऊं धुन घड़ी घड़ी,
- पारस प्यारा प्रभुवर मन बसिया,
- पारस प्रभु तारो
- पारस प्रभु री म्हैं तो
- पारस प्रभु रो नाम, निसदिन में ध्याऊं जी, मैं ध्याऊं।
- पारस प्रभुवर! थांरै चरणां में म्हे शीश झुकावां हां,
- पार्श्व नाम मंगलकारी,
- पिंजरे का पंछी
- पिया जिसे पीयूष मान कर
- पीते जो शराब करते हैं बर्बादी,
- पीर हरो महावीर
- पुरुषो, अपनी हार न मानो
- पूज्यवर महाप्रज्ञ भगवान।
- पूरब में छाई है लाली
- पैसा ठन ठनाठन ठन न न न न न बोले रे,
- पौरुष
- प्यार का पथ क्यों छोड़ दिया
- प्यारा तेरापंथ, इसकी जग में शान बढ़ायेंगे,
- प्यारा नयन सितारा
- प्यारे बच्चो, करो न क्रोध
- प्यारे बच्चो, सीखो ज्ञान
- प्यारे बच्चो! प्यारे बच्चो! प्यारे बच्चो! सुन लो सभी,
- प्यारे बच्चों, बनो विनीत
- प्यारै प्रभु रा दरशण करणै मन म्हारो उमगावै है,
- प्यारो उणिहारो, देख ओ थांरो, हिवड़ो ठर्यों है म्हांरो आज।
- प्यारो प्यारो पारस नाम, जग उजियारो पारस नाम,
- प्यारो प्यारो, ओ थांरो उणिहारो,
- प्यारो प्यारों तुलसी
- प्यारो लागै सांवरियै रो नाम,
- प्यारो सांवरियै रो नाम आवै संकट में जो काम
- प्रकृति नया जीवन पाएगी
- प्रगति पंथ पर युवको! बढ़ते जाओ, लेकर साहस का सबल,
- प्रगति प्रतीक्षा करती
- प्रज्ञा के अवतार परम गुरु महाप्रज्ञ को नमन हमारा,
- प्रज्ञा के दीप जलेंगे, मन के संकल्प फलेंगे,
- प्रज्ञा दीप जला ले
- प्रज्ञा सागर की लहरें
- प्रज्ञा-अवतार ! शासन शेखर! लो शत-शत वन्दन।
- प्रज्ञापर्व : अमर अवदान
- प्रणति-गीत
- प्रतिपल ध्यान लगाये
- प्रबन्धन
- प्रभु आदिश्वर करुणा सागर तुम जग के अखिलेश
- प्रभु का जाप
- प्रभु का नाम, प्रभु का नाम, भज ले मन तुं प्रभु का नाम,
- प्रभु का सुमिरन जो नित करता।
- प्रभु जी! सरणै करो नी म्हारी साधना, साधना,
- प्रभु तुलसी तुम्हें है नमन, ये कैसा खिलाया चमन,
- प्रभु तुलसी ने दिखलाए पथ, गण के विकास के।
- प्रभु दो वरदान
- प्रभु ने जो दीप जलाया, हम प्रतिपल स्नेह पिलाएं।
- प्रभु ने भजल्यो रे।
- प्रभु पार्श्व देव चरणों में
- प्रभु पार्श्वनाथ भगवान
- प्रभु भगति में रंग जाना,
- प्रभु मन मन्दिर में आओ
- प्रभु! यह तेरापंथ सुप्यारा।
- प्रभुजी स्वीकारो रे, म्हारी भावता रे,
- प्रभुवर का जप कर लो।
- प्रभुवर भिक्षु स्वामी का शासन सबल सहारा है।
- प्रभू! म्हारै मन-मंदिर में पधारो
- प्रभो! क्यों हो गए ओझल,
- प्रभो! तुम्हारे आदर्शों पर चलता जाए जग सारा
- प्रभो! तुम्हारे पावन पथ पर
- प्रभो! यह तेरापंथ महान
- प्रभो! यह पावन तेरापंथ।
- प्रहसम परम पुरुष नै समरू
- प्राणी! कर्म समो नहीं कोई
- प्राणी! समकित किणविध आई रे
- प्राणों से प्यारा तेरापंथ
- प्रात: उठ परमेष्ठी वन्दन
- प्रातः उठकर ध्यान धरूं मैं विमल भावना भाऊं हो
- प्रातः स्मरणीय
- प्राप्त कर विज्ञान आत्मन्! अज्ञता का तम हरो,
- प्राप्त कर संघीय जीवन, संघ सीमा में चलें।
- प्रायश्चित्त गीत
- प्रीत प्रभु से कर लो
- प्रेक्षाध्यान गीत
- प्रेक्षाध्यान री पावन गंगा में डुबकी लगा,
- प्रेम स्यूं सब बोलो, रायऋषि जयकार।
- प्रेरणा गीत
- फड़कती भुजाएं
- फरिश्ता अमन का
- फलता रहे गण यह महान्, मिलता रहे धरती को त्राण
- फूला फूला फिर रहा
- फूलों में गन्ध ज्यों सरराये
- फेरो मन का चकरिया