श से गीतिकाएँ
77 रचनाएँ
- शक्ति लगाओ नये वश।
- शक्ति संवर्धन करना है
- शक्ति-पीठ
- शत-शत अभिनंदन—३
- शत् शत् वंदन
- शद्धा-सुमन
- शबनम की जंजीरें
- शरण ले लै रे, धर्म रो शरण ले लै रे,
- शरणो गुरुर रो,
- शलभ! तेरी जिन्दगी का मूल्य दीपक आंकता कब?
- शान
- शान्ति का आधार
- शान्ति विधायक शान्ति जिनेश्वर, प्रातः मैं उठ कर ध्याऊं
- शासण ओ भिक्षु रो सुरगां स्यूं है प्यारो
- शासन आपां रो,
- शासन कल्पतरू
- शासन की शान हो, नेता महान् हो,
- शासन प्यारो रै,
- शासन रखवारे, जन-जन के
- शासन रा सम्राट्, मुखड़ो लागै प्यारो जी,
- शासन रा सरताज प्यारा गुरुवर म्हारा जी।
- शासन रा स्तम्भ
- शासन रा स्वामी, ओ अन्तरयामी,
- शासन रा स्वामी, धरां म्है, धरां म्है, थांरो ध्यान।।
- शासन स्वामी ओ, म्हारी सुणल्यो पुकार, अन्तर अज्ञान
- शासन हमारी आंखों का तारा,
- शासन है आपां रो न्यारो, जैन जगत् रो तारो है,
- शासन है नंदनवन
- शासन-नायक विघ्न-विनायक, गुणी-जन रा सिरताज रै,
- शासन, शासन, शासन,
- शासनश्री मुनिवर दिनकर
- शास्त्र श्रवण अध्ययन मनन से
- शिक्षा तूं संता री धार लै,
- शिखर पुरुष! शिखरों की यात्रा, करें सतत अभिराम
- शिविर
- शिविर लगता प्यारा, जीवन का सहारा,
- शिविर साधना
- शिविर साधना
- शिविर—संगान
- शुभ संकल्प करो नित उठकर।
- शून्य में संगीत
- शोभै नेमांजी रा नन्द, चमकै ज्यांरो भाल अमन्द,
- श्रद्धा
- श्रद्धा और समर्पण द्वारा मुखरित जिसका हर कण है,
- श्रद्धा के कुसुम
- श्रद्धा रा परचा
- श्रद्धा रो पथ मंगलकारी
- श्रद्धा से नमन करें हम
- श्रद्धा से भीगे फूलों को मैं नाथ! चढ़ाने लाया हूं,
- श्रद्धांज्लि
- श्रम से मत कतराओ, बच्चों!।
- श्रावक कामदेव
- श्रावक व्रत धारो
- श्रावक—संकल्प
- श्रावक—साधना
- श्रावकजी! थांरै संथांरै रो भारी रंग छायो।
- श्रावकजी! परिणामां ने थे सेंठा राखज्यो,
- श्राविका श्रीमती
- श्री जिनशासन के उद्गाता, मर्यादा के नव निर्माता,
- श्री जिनशासन दीप बन, प्रकटे भिक्षु स्वाम,
- श्री णमोक्कार का ध्यान करो।
- श्री तुलसी भगवान वंदन-वंदन है
- श्री देव गुरू ट धर्म मेरे
- श्री भिक्षु का नाम सुंदर
- श्री भिक्षु की जय जयकार जन जन पर भारी उपकार
- श्री भिक्षु चालीसा – भिक्षु भिक्षु गणपाल की महिमा है सर्वत्र
- श्री भिक्षु स्वामी रो परम प्रताप है
- श्री भिक्षू का जीवन-दर्शन, मंजुल मर्याद-महोत्सव है।
- श्री भैक्षव शासन की महिमा अपरम्पार है।
- श्री महावीर प्रभु मंगल
- श्री महाश्रमण चरणों में
- श्रीचरणां में मन लाग्यो, प्रभु म्हारो भाग्य बड़ो,
- श्रीभिक्षु स्वामी चरणां में बंदन बारम्बार है।
- श्रुत सागर
- श्रेष्ठ बालक वह सुगुण का जो अमित भण्डार है।
- श्रोता निसुणो गुरुवाणी लाल सुगणजी।
- श्वेतांबर तेरापंथ के जयकारे